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जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे विद्यार्थी, नदी पार करना मुश्किल

Fri, 12 Aug 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर)
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पांवटा साहिब(सिरमौर)। बरसात का मौसम क्यारी डाडुआ गांव के लिए आफत से कम नहीं। अभिभावक उफनती गिरि की लहरों के बीच से बच्चों को कंधों पर उठाकर नदी पार करवाने को विवश हैं। हर रोज लोग अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं। कारण सिर्फ यही है कि गिरि नदी पर एक अदद पुल नहीं बन पाया। यहां अक्सर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।


पूर्व बीडीसी सदस्य धर्मेंद्र अत्री, स्थानीय निवासी मदन शर्मा व सुरजीत सिंह ने बताया कि गांव में प्राथमिक पाठशाला है। छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को शड़ियार व चांदनी स्कूल जाना पड़ता है। बीच में गिरि नदी इसमें बाधा बनी है। बरसात में नदी का जल स्तर बढ़ने से खतरा बढ़ जाता है। नदी के रास्ते केवल 3 किमी दूरी पर स्कूल पड़ता है। अन्यथा 35 से 40 किमी दूर घूम कर जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार गांव से खाली अच्छोन नाड़ी मार्ग बनाने या नदी पर पुल की मांग कर चुके हैं। हर बार सरकार व नेता बदल जाते हैं, स्थिति जस की तस रह जाती है।
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उधर, ग्राम पंचायत छछेती के प्रधान सतपाल ठाकुर ने कहा कि सरकार से पुल व सड़क निर्माण की मांग रखी है। बरसात में तो स्थिति काफी विकट हो जाती है। बरसात में यहां हालात बिगड़ जाते हैं। किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में पूरा दिन लगता है। इसके लिए 6 किमी खड़ी पहाड़ की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
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उधर, सीपीएस विनय कुमार का कहना है कि बनेथ-चांदनी पुल निर्माण का प्रपोजल तैयार किया गया है। जल्द इसे स्वीकृति के लिए भिजवाया जाएगा।
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ऐसी है गांव की विकट भौगोलिक स्थिति
-धारटीधार क्षेत्र निवासी मदन शर्मा, सुरजीत सिंह, विनोद कुमार, सुखदत्त व किशन ने कहा कि बरसात को 2 माह ग्रामीण गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं। गांव में करीब 30 परिवार हैं। गांव की भौगोलिक स्थिति विकट है। सामने बरसात में उफान पर रहने वाली गिरि नदी है। गांव से नाडी सतौन को पैदल मार्ग पर पहाड़ी से भूस्खलन तथा माईन में ब्लास्टिंग के पत्थर लगने का खतरा रहता है।
 
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