ददाहू (सिरमौर)। कोरोना काल के बीच जिले के खनन व्यवसाय को गहरा झटका लगा है। खदानों के माध्यम से जिले में चल रहा चूना पत्थर का कारोबार सिमटने के कगार पर पहुंच चुका है। खान संचालकों के लिए खर्च अधिक और आमदन कम वाली स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां तक कि जिले के चुनाव पत्थर की बाहरी राज्य में मांग मात्र 20 फ़ीसदी ही रह गई है। खनन व्यवसायी उधारी में अपना माल उठवा रहे हैं। इससे खनन व्यवसाय को धरातल पर खडा रखा जा सके। जिले के रेणुका और शिलाई विधानसभा क्षेत्र में 17 चूना पत्थर की खानें संचालित हैं। रेणुका क्षेत्र मे पिछले चार दशकों से ही यह व्यवसाय फलफूल रहा है। जिसके माध्यम से प्रदेश सरकार को रॉयल्टी व टैक्स के रूप में करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है। सिरमौर जिले के चूना पत्थर की पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में आपूर्ति की जाती है। जहां इन दिनों राजस्थान ने अपना कब्जा जमा लिया है। जिले के खान व्यवसायी राजस्थान से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। जिसे सिरमौर जिले के चूना पत्थर की मांग मात्र 20 फीसदी में ही सिमट कर रह गई है। खान मालिक संघ के जिला अध्यक्ष मीत सिंह ठाकुर ने बताया कि कोरोना के दौरान चूना पत्थर के कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। हिमाचल में संसाधनों के अभाव के साथ-साथ टैक्स, खर्च और मालभाड़ा दूसरे राज्यों से कहीं अधिक है। राजस्थान से प्रतिस्पर्धा कर पाना भी कठिन है। इस कारण सिरमौर जिले के पत्थर की आपूर्ति न के बराबर है। उधर, जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने बताया कि बीते दिनों सिरमौर जिले की खाने बंद होने का फायदा राजस्थान के खान प्रबंधकों ने उठा लिया है। राजस्थान ने चूना पत्थर की मंडियों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। इससे जिले के खनन व्यवसायी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गए हैं।