शिशु रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त, निजी क्लिनिकों में करवाना पड़ रहा इलाज
अस्पताल में रोजाना सौ से अधिक शिशु रोगियों की होती है ओपीडी
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। ढाई वर्षों से एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) बंद पड़ी है। शिलाई और पांवटा साहिब समेत विभिन्न क्षेत्रों से रोज सौ से अधिक शिशु रोगियों की ओपीडी रहती है। यहां लंबे समय से शिशु रोग विशेषज्ञ का पद फिर से रिक्त है। सिविल अस्पताल पांवटा में बाल मरीजों के उपचार में काफी दिक्कतें आने लगी हैं। परिजनों को मजबूरन नन्हे मरीजों को निजी अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
बता दें कि सिरमौर जिले के पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) है। नवजात और समय से पहले जन्मे शिशुओं की देखभाल के लिए समर्पित जिले की पहली सुविधा के रूप में वर्ष 2015 में स्थापित इकाई ने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन के कार्यकाल में अनगिनत जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब यह इकाई ढाई वर्षों से वीरान पड़ी है। इस कक्ष में अत्याधुनिक मशीनें, जिनमें रेडिएंट वार्मर और फोटोथेरेपी इकाइयां शामिल हैं, अनुपयोगी पड़ी हैं।
एसएनसीयू नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद पीलिया और संक्रमण जैसी बीमारियों से पीड़ित होने पर मुफ्त उपचार देने के लिए सुसज्जित थी। खासकर निर्धन व मध्य वर्गीय परिवारों के लिए यह सेवा जीवन रेखा थी। अच्छर सिंह चौधरी, रहमान अली, रामकिशन शर्मा, दिनेश चौहान, प्रदीप ठाकुर व रमेश शर्मा ने बताया कि इन दिनों सूखी ठंड के चलते बीमार शिशुओं की संख्या काफी बढ़ गई है। ऐसे में गांवों से लंबी दूरी तय कर पांवटा पहुंचने वाले बच्चों के परिजनों को निजी चिकित्सा सेवाओं पर भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में शिशु रोग विशेषज्ञ उच्च स्वास्थ्य शिक्षा के लिए चले गए हैं। इसके चलते एक बार फिर पांवटा साहिब में बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कराया अवगत : डॉ. सुधी
शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। शिशु रोग विशेषज्ञ व प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों के पद रिक्त होने के कारण एसएनसीयू यूनिट कार्य नहीं कर पा रही है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
-डॉ. सुधी गुप्ता, प्रभारी, सिविल अस्पताल पांवटा साहिब