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हिमाचल के सिरमौर की घटना: नैनाटिक्कर में पुजारी पर गंभीर आरोप, मारपीट से जातिसूचक शब्दों तक... एफआईआर दर्ज

Sun, 30 Aug 2026 11:42 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन।

सार

सिरमौर जिले के नैनाटिक्कर के मेहली गांव में मंदिर के पुजारी पर एक व्यक्ति से मारपीट और कथित जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता बाला राम ने पुलिस को बताया कि 29 अगस्त को जल शक्ति विभाग के काम के दौरान घटना हुई। शिकायत में डंडे से सिर पर चोट और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। पच्छाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पीड़ित बाला राम - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सिरमौर जिले के नैनाटिक्कर क्षेत्र के मेहली गांव में मंदिर के पुजारी पर एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने और कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। शिकायत मिलने के बाद पच्छाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस कार्रवाई का दलित शोषण मुक्ति मंच ने स्वागत किया है।

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शिकायतकर्ता बाला राम, निवासी मेहली ने पुलिस को बताया कि 29 अगस्त को जल शक्ति विभाग से जुड़े काम के दौरान मंदिर के पुजारी के साथ उसका विवाद हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने सिर पर डंडे से चोट पहुंचाने और धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
शिकायत के आधार पर पुलिस थाना पच्छाद में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले को लेकर दलित शोषण मुक्ति मंच ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। मंच के संयोजक आशीष कुमार ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करने की मांग की है।

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सभी साक्ष्यों की जांच की मांग
मंच ने कहा कि मामले की जांच के दौरान उपलब्ध सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसमें मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच शामिल है। मंच ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम समेत लागू अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग
दलित शोषण मुक्ति मंच ने यह भी मांग उठाई है कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार पर किसी तरह का दबाव या धमकी न बने। इसके लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। मंच का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच को भी उसी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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