आठ बिस्वा जमीन विभाग के नाम होने के बाद भी नहीं बन पाया भवन
छोटी मोटी सर्जरी बरामदे में कर रहे चिकित्सक, सामान रखने की भी दिक्कत
राजपाल शर्मा
सतौन (सिरमौर)। शिलाई विधानसभा क्षेत्र के प्रवेश द्वार सतौन में पशु चिकित्सालय पिछले 25 सालों से किराये के भवन में चल रहा है। इससे पहले 20 साल डिस्पेंसरी भी किराये के भवन में ही चली। ऐसे में दो कमरों में चल रहे चिकित्सालय के पास न स्टोर रूम है और न ही ऑपरेशन के लिए इंडोर की ही कोई सुविधा है। आलम यह है कि छोटी-मोटी सर्जरी बाहर बरामदे में ही करनी पड़ रही है।
गौरतलब रहे कि सतौन पशु चिकित्सालय के अंतर्गत सात संस्थान आते हैं। जिसमें पांच पशु डिस्पेंसरी मानल, चांदनी, कोड़गा,कठवार और बनैत हैं। इसके अलावा दो मुख्यमंत्री योजना के तहत खोली गई डिस्पेंसरी पोक्का और रोहाना शामिल हैं।
अहम बात यह है कि इस सतौन पशु चिकित्सालय के अंतर्गत 10 पंचायतों के 25 से 30 गांव आते हैं। जिसमें लगभग सात हजार बड़े पशु और तीन हजार छोटे पशु पंजीकृत हैं। चिकित्सालय के अंतर्गत सतौन, पोक्का, भजौन, चांदनी, कठवार, कोड़गा, सखोली, बनैत, कांटीमशवा, बड़वास के ग्रामीण अपने पशुओं का इलाज करवाने आते हैं।
जानकारी अनुसार 80 के दशक में सतौन में पशु डिस्पेंसरी खोली गई थी। उसके बाद 2003 में इसे स्तरोन्नत करके पशु चिकित्सालय बनाया गया। हैरानी की बात यह है कि आज तक इसका अपना भवन नहीं बना है। पिछले साल विभाग के लिए आठ बिस्वा जमीन चिकित्सालय भवन और गो सदन बनाने के लिए नाम हो चुकी है। लोक निर्माण विभाग के द्वारा एस्टीमेट भी बनाया जा चुका है लेकिन अभी तक सरकार और विभाग पशु चिकित्सालय के लिए बजट का प्रावधान नही कर सके। यहां पर सबसे ज्यादा समस्या पशुओं की सर्जरी करने में हो रही है। डॉक्टर बाहर बरामदे में सर्जरी करने के लिए विवश हैं।
चिकित्सक अमित महाजन ने कहा कि सतौन पशु चिकित्सालय के लिए भवन की कमी बहुत बड़ी समस्या है। इसके अंतर्गत काफी बड़ा क्षेत्र आता है। ऐसे में यहां मात्र दो कमरे हैं। समान इत्यादि रखने में समस्या हो रही है। अपनी जगह नहीं होने के कारण पशुओं का इलाज करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूमि विभाग के नाम हो चुकी है और प्राक्कलन तैयार किया जा चुका है। उम्मीद है जल्द अपना भवन मिल सकेगा।
-संवाद
सतौन पशु चिकित्सालय के बरामदे में पशुओं को उठाने के लिए लगी मशीन। संवाद