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छह दिन बाद भी बहाल नहीं हुआ पांवटा-शिलाई नेशनल हाईवे, मीलों पैदल चल रहे लोग

Wed, 04 Aug 2021 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, सतौन (सिरमौर)

सार

केंद्र सरकार की एक्सपर्ट टीम क्षेत्र का लगातार दौरा कर रही है। मंगलवार को जीएसआई की टीम ने सर्वे किया था। जबकि बुधवार को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के एक्सपर्ट जायजा लेने मौके पर पहुंचे। उन्होंने बारीकी से जांच की जिसकी रिपोर्ट तीन चार दिन में विभाग और सरकार को सौंपी जाएगी।
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एनएच- 707 पांवटा शिलाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में एनएच- 707 पांवटा शिलाई सड़क को बंद हुए छह दिन हो गए हैं। आम जनमानस की दुश्वारियां अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मुसाफिरों को दो से तीन किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ रहा है। हालांकि, एनएच विभाग मुश्तैदी से काम कर रहा है लेकिन मौसम और तकनीकी समस्या के कारण सड़क खोलने में अभी समय लग सकता है।

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केंद्र सरकार की एक्सपर्ट टीम क्षेत्र का लगातार दौरा कर रही है। मंगलवार को जीएसआई की टीम ने सर्वे किया था। जबकि बुधवार को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के एक्सपर्ट जायजा लेने मौके पर पहुंचे। उन्होंने बारीकी से जांच की जिसकी रिपोर्ट तीन चार दिन में विभाग और सरकार को सौंपी जाएगी। एनएच विभाग प्राथमिक तौर पर छोटे वाहन, एंबुलेंस के लिए सड़क खोलने का प्रयास कर रही है जिसमें बसों का निकलना अभी मुश्किल रहेगा लेकिन आमजन को दो किलोमीटर पैदल सफर नहीं करना पड़ेगा।

यात्री 200 मीटर पैदल चलकर दूसरे छोर पर दूसरी बस पकड़ सकेंगे। गौरतलब है कि एनएच 707 पांवटा -शिलाई मार्ग 30 जुलाई को बड़वास में समीप टूट गया था जिससे 100 गांव का संपर्क पांवटा से टूट गया। बुधवार को एक व्यक्ति को अपनी बूढ़ी मां को रस्सी की सहायता से पीठ पर उठा कर लाना पड़ा जिसे वह पांवटा अस्पताल में इलाज के लिए ले जा रहे थे।
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कमरऊ जाने वाले अध्यापकों ओर अन्य कर्मचारियों को मजबूरी में जोखिम भरा सफर करना पड़ा। एनएच के प्रोजेक्ट निदेशक विवेक पंचाल ने बताया कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के एक्सपर्ट ने घटना स्थल का जायजा लिया है जिसकी रिपोर्ट तीन चार दिनों में आ जाएगी। सड़क खोलने का कार्य चला हुआ है। प्राथमिक तौर पर छोटे वाहन और एंबुलेंस के लिये सड़क खोली जाएगी। इसमें बस से सफर करने वाले लोग पैदल चल कर आसानी से दूसरे छोर पर जाएंगे।

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बड़वास में खनन से हुआ भू-स्खलन

पांवटा साहिब-शिलाई नेशनल हाईवे बड़वास के समीप हुआ भूस्खलन चूना पत्थर के लिए हुए खनन की वजह से हो सकता है। भूस्खलन के लिए मौके पर जांच करने पहुंची भू-वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसी आशंका जताई है। अध्ययन के बाद भू-वैज्ञानिकों ने उपायुक्त सिरमौर रामकुमार गौतम को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में निदेशक इंजीनियरिंग भू-विज्ञान मनोज कुमार ने जानकारी दी है कि उनके साथ भू-विज्ञानी पी. जगन और सहायक भू-विज्ञानी ए. पुनिया इस टीम में शामिल रहे। 

टीम ने अध्ययन में पाया गया कि भूस्खलन स्थल पर पहले चूना पत्थर के लिए माइनिंग होती रही है, जिस वजह से उस क्षेत्र की भूमि को क्षति पहुंची होगी। भूस्खलन से दो दिन पहले हुई तेज बारिश के रिसाव की वजह से पहाड़ का कुछ हिस्सा अपनी जगह से खिसक गया। मनोज कुमार ने बताया कि टीम ने अध्ययन में पाया है कि सड़क की मौजूदा अलाइनमेंट पर ही पहाड़ की कटाई और खाली हिस्से को भरने से सड़क को पुन: बनाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, इस कार्य से बड़वास गांव को भी कोई खतरा नहीं होगा। 
उपायुक्त रामकुमार गौतम ने बताया कि जहां भूस्खलन हुआ था उसी जगह फिर से सड़क निकाली जा रही है। सड़क निर्माण कार्य से बड़वास गांव को कोई खतरा नहीं होगा। उपायुक्त ने कहा कि टीम के अनुसार पहाड़ की कटाई और खाली हिस्से को भरने से सड़क को पुन: बनाया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय/राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक सप्ताह के भीतर यातायात बहाल होने का आश्वासन दिया है। 
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