गंदे पानी और धुएं से दूषित हो रहे खेत और पेयजल स्रोत, लोगों को त्वचा समेत लग रही दूसरी बीमारियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब के रामपुर माजरी क्षेत्र में एक उद्योग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को जय सिंह की अगुवाई में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नाहन में उपायुक्त सिरमौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उद्योग से निकलने वाले धुएं और दूषित पानी के कारण आसपास के सात-आठ गांवों की करीब सात से आठ हजार की आबादी प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर उद्योग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल जय सिंह, टेकचंद, सादिक अली, अशोक सैनी, बाबूराम, सुनील और राहुल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उद्योग से निकलने वाला दूषित पानी नाले में छोड़ा जा रहा है, जो आगे बाता नदी में मिलता है। इससे रास्ते में पड़ने वाली जमीन, फसलों और जलस्रोतों के दूषित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण के कारण घास व पौधों पर काली परत जम रही है। इससे खेतीबाड़ी और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के कारण लोगों को त्वचा और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई। बच्चों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार, उद्योग कई वर्षों से क्षेत्र में संचालित है, लेकिन हाल के समय में इस्तेमाल की जा रही सामग्री के कारण प्रदूषण की समस्या अधिक गंभीर हो गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि दूषित पानी और धुएं के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासन को चुप्पी तोड़कर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रदूषण की समस्या की जांच करवाई जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।