पांवटा में बरसाती नाले उफान पर रहने के कारण हर वर्ष भूमि कटाव से भारी क्षति होती है। अब इन नदी नालों का तटीयकरण होगा जिसके लिए करीब 65 करोड़ की 2 योजनाएं तैयार की गई है। इससे स्टेट टेक्निकल एडवाईजरी कमेटी (स्टैग) के पास मंजूरी को भेजा गया है। दोनों योजनाओं को मंजूरी मिलते ही क्षेत्र में करीब 22 किमी नदी नालों का तटीयकरण कार्य हो सकेगा।
पांवटा क्षेत्र में पहुंचने वाली गिरी नदी में राजबन तथा नवादा में यमुना नदी के संगम तक आसपास के क्षेत्र में जल स्तर बढ़ने पर भूमि कटाव होता रहा है। इससे आसपास लगते कुछ रिहायशी स्थलों पर भी संकट मंडराता रहा है। इसलिए आईपीएच विभाग ने राजबान व नवादा का करीब 5 किलोमीटर तटीकरण क्षेत्र के लिए चिन्हित किया। इसके लिए 27 करोड़ का प्राकलन तैयार किया है।
दूसरी योजना में हर साल कहर बरपाने वाली बरसाती नालों सुद्दोंवाला, कौंधरी व मंडी खाले के तटीकरण की योजना है। इन खालों में आसपास लगते रिहायशी मकान या उपजाऊ भूमि क्षेत्र है। ऐसे में करीब 17 किमी संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित किया गया है। इसके लिए विभाग ने डीपीआर तैयार की है। इन योजनाओं को स्टैग की बैठक में रखा जाएगा। योजनाओं को मंजूरी मिलने पर सैकड़ों किसानों को भूमि कटाव से राहत मिल सकेगी।
उधर, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिशासी अभियंता पांवटा नरेश धीमान ने पुष्टि की है। गिरी नदी के तटीकरण पर 27 करोड़ व सुद्दोंवाला, कौंधरी व मंडी खाले के तटीकरण के लिए करीब 38 करोड़ की योजना तैयार कर मंजूरी को भेजी है। दोनों योजनाओं को मंजूरी मिलने पर करीब 22 किलोमीटर नदी-नालों के आसपास क्षेत्रों का तटीकरण का कार्य हो सकेगा।