ग्राउंड रिपोर्ट
संशोधित समाचार-
-एकमात्र नियमित विशेषज्ञ भी 31 जुलाई को होंगे सेवानिवृत्त, प्रतिनियुक्ति के भरोसे चल रही जांच सेवाएं
-पांच विशेषज्ञ पद खाली, अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन का रेडियोलॉजी विभाग इस समय खुद वेंटिलेटर पर आ गया है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन रेडियोलॉजी जैसी अहम सेवा स्थायी विशेषज्ञों के बजाय प्रतिनियुक्ति (प्रतिनियुक्ति) के सहारे चल रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि विभाग के एकमात्र नियमित रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर हैं।
रेडियोलॉजी विभाग में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य जरूरी जांचें होती हैं। यह विभाग गायनी, मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स सहित लगभग हर चिकित्सा शाखा की रीढ़ माना जाता है। बावजूद इसके, यहां एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद और जूनियर रेजीडेंट के चार पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार, निजी अस्पताल बन रहे मजबूरी
विशेषज्ञों की कमी का सबसे बड़ा असर सामान्य मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती और आपातकालीन मरीजों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण ओपीडी से आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों को अंततः निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब प्रतिनियुक्ति पर आए रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर होते हैं या न्यायालय कर्तव्य में चले जाते हैं। ऐसे दिनों में अल्ट्रासाउंड सेवाएं लगभग ठप हो जाती हैं और केवल आपातकालीन मरीजों की जांच ही संभव हो पाती है।
31 जुलाई के बाद और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
वर्तमान में विभाग के नियमित रेडियोलॉजिस्ट इसी माह के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में यदि समय रहते स्थायी नियुक्तियां नहीं हुईं तो रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह प्रतिनियुक्ति व्यवस्था पर निर्भर हो जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में इस तरह की व्यवस्था लंबे समय तक मरीजों के हित में नहीं मानी जा सकती। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों सरकार मेडिकल कॉलेज को इतना नजरअंदाज कर रही है?
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रेफरल अस्पताल होने के कारण दबाव कई गुना
नाहन मेडिकल कॉलेज केवल शहर का अस्पताल नहीं, बल्कि पूरे सिरमौर जिले का प्रमुख रेफरल केंद्र है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों से गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना पीड़ितों को यहीं भेजा जाता है। ऐसे में रेडियोलॉजी विभाग पर स्वाभाविक रूप से भारी दबाव रहता है। विशेषज्ञों की कमी के कारण जांचों में देरी का असर उपचार प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।
मरीज बोले- सरकारी अस्पताल में जांच नहीं, मजबूरी में जेब ढीली करनी पड़ रही
बेचड़ का बाग निवासी रमेश कुमार, नेहर स्वार के बाबू राम, बागथन के कपिल और निहोग की राधा ने बताया कि सामान्य मरीजों को समय पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही। भर्ती मरीजों को प्राथमिकता मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पतालों में महंगी जांच करवानी पड़ रही है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की पर्याप्त नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
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प्रबंधन ने माना- रिक्त पदों के लिए भेजा गया है प्रस्ताव
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लो ने बताया कि रेडियोलॉजी विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार और उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उम्मीद है कि जल्द नियुक्तियां होने पर मरीजों को नियमित और बेहतर रेडियोलॉजी सेवाएं मिल सकेंगी।
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