ऊपरी क्षेत्रों में बारिश से गिरि नदी का जलस्तर बढ़ा, उत्पादन 18 मेगावाट पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
धौलाकुआं (सिरमौर)। शिमला और सोलन के ऊपरी क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश का असर अब गिरि नदी पर दिखाई देने लगा है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से गिरि जलविद्युत परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़कर 18 मेगावाट तक पहुंच गया है। इससे जहां हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को राहत मिली है, वहीं धौलाकुआं और पांवटा साहिब क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद जगी है।
दरअसल, धौलाकुआं और पांवटा साहिब क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई का कार्य जोरों पर है। हर वर्ष 15 जून के बाद शुरू होने वाली धान रोपाई के लिए किसानों की सिंचाई व्यवस्था मुख्य रूप से गिरिनगर स्थित गिरि जलविद्युत परियोजना से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर रहती है। पिछले दिनों गिरि नदी में जलस्तर काफी कम होने के कारण परियोजना में बिजली उत्पादन घटकर 9 मेगावाट तक पहुंच गया था। इसका असर न केवल बिजली उत्पादन पर पड़ा, बल्कि सिंचाई के लिए पानी की कमी से किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अब ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद गिरि नदी का जलस्तर बढ़ने से बिजली उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे विद्युत बोर्ड को आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ सिंचाई योजनाओं के माध्यम से किसानों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की संभावना है।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय होने के बाद गिरि नदी का जलस्तर और बढ़ेगा। इससे परियोजना की दोनों टर्बाइनों का पूर्ण क्षमता से संचालन संभव हो सकेगा और बिजली उत्पादन बढ़कर 60 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ होगी।
गिरि जलविद्युत परियोजना के रेजिडेंट इंजीनियर (आरई) अशोक रुपता ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश के कारण परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़कर 18 मेगावाट हो गया है। उन्होंने कहा कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने पर दोनों टर्बाइनों का संचालन शुरू होने से बिजली उत्पादन 60 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा।-