साल 2017 को शिलाई क्षेत्र का मामला, मुकदमे में अभियोजन के साक्ष्य कमजोर, सीमांकन रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
आरोपियों से नहीं जुड़ सके साक्ष्य, जेसीबी चालक की गवाही नहीं हुई दर्ज
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जिले के झकांडो आरक्षित वन क्षेत्र में वर्ष 2017 में कथित सड़क निर्माण के चर्चित मामले में अदालत ने आरोपी मोहर सिंह और जाती राम को सभी आरोपों से बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने कहा कि केवल घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी से ये निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सड़क निर्माण उन्होंने कराया था।
फैसले में ये भी कहा गया कि जिस जेसीबी मशीन से सड़क निर्माण का आरोप लगाया गया था, उसके चालक को अभियोजन ने गवाह के रूप में पेश नहीं किया। वहीं जेसीबी मालिक ने भी अदालत में अभियोजन के दावों का समर्थन नहीं किया। ऐसे में आरोपियों और कथित निर्माण कार्य के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हो सका।
मामला वर्ष 2017 में शिलाई थाना क्षेत्र में पंजीकृत हुआ था। वन विभाग ने 15 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि झकांडो आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति जेसीबी से सड़क का निर्माण किया गया। इससे वन भूमि को करीब 9.85 लाख रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया था। शिलाई पुलिस ने आईपीसी की धारा 447 तथा आईएफए की धारा 26 और 33 के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 14 गवाहों के बयान दर्ज करवाए, लेकिन अदालत ने पाया कि वन भूमि का सीमांकन (डिमार्केशन) विधिसम्मत तरीके से सिद्ध नहीं किया गया। आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। इससे यह निर्णायक रूप से साबित नहीं हो पाया कि कथित सड़क वास्तव में आरक्षित वन भूमि के भीतर बनाई गई थी।
इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ऐसे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनके आधार पर उन्हें दोषी ठहराया जा सके। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
जांच में ये तथ्य आए थे सामने
पुलिस जांच के मुताबिक एनएच-72बी से भटूंडी गांव की ओर करीब दो किलोमीटर सड़क पहले से बनी हुई थी। इसके आगे नए सड़क निर्माण का काम चल रहा था। इसके लिए इस्तेमाल की जेसीबी मस्त राम की थी, जबकि उसका चालक सतीश कुमार था। जांच में यह भी दावा किया गया कि मोहर सिंह और जाती राम ने जेसीबी लगवाकर आरक्षित वन भूमि पर करीब 95 मीटर सड़क बनवाई थी। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा कर दिया गया था।