जिले की राजगढ़ तहसील के गिरिपार क्षेत्र में इन दिनों माघी त्योहार की धूम है। पूरा राजगढ़ पारंपरिक व्यंजनों से महक रहा है। घर-घर में असकली और घिंडा जैसे स्वादिष्ट व्यंजन माघी त्योहार पर परोसे जा रहे हैं। वहीं, कई क्षेत्रों में सामूहिक रूप से खाडू और बकरे काटने की भी परंपरा है।
माघी पर पहले दिन पारंपरिक व्यंजन असकली परोसा जाता है। इस दिन को असकांटी कहा जाता है। दूसरे दिन आटा घिंडा पकाया जाता है। इस दिन को डगयांटी कहा जाता है। माघी त्योहार के दिन को अतरांटी कहा जाता है। इस दिन गांवों में सामूहिक रूप से खाडू और बकरे काटने की परंपरा हैं।
राजगढ़ तहसील की अधिकतर पंचायतों में बकरे काटने की प्रथा लगभग खत्म होती जा रही है। हालांकि, यहां के ऊंचे बर्फवारी वाले इलाकों में आज भी बकरे काटने की प्रथा जारी है। राजगढ़ तहसील के पझौता, रासुमांदर तथा राजगढ़ की नेरी कोटली, दाहन, दीदग और छोगटाली पंचायतों में बुधवार को लोगों ने बकरे काटे।
आज बनेंगे खीर और पूड़े
माघ के पहले दिन यानी संक्रांति को स्थानीय लोग खीर और पूड़े बनाएंगे। लोग अपने ईष्ट देवताओं के मंदिरों में जाकर माथा भी टेकेंगे। समूचे गिरिपार क्षेत्र में यह त्यौहार लगभग इसी परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। देशभर में माघ को सबसे श्रेष्ठ और धर्मी महीना माना जाता है। हालांकि, गिरिपार क्षेत्र में इस माह के प्रारंभ में ही बकरे काटे जाते हैं। उसका मांस सुखाकर कई महीनों तक खाया जाता है। यह त्योहार क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति का परिचायक है।