परमिट से अधिक चार पेटियां ही आरोप के दायरे में रखने के निर्देश
15 नवंबर 2024 को संगड़ाह थाने में दर्ज हुआ था मामला, हरिपुरधार में पिकअप से बरामद हुई थी शराब
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने शराब परिवहन से जुड़े मामले में कहा कि परमिट के तहत ले जाई जा रही शराब को अवैध परिवहन मानकर आरोप में शामिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने रमेश कुमार की क्रिमिनल रिवीजन स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से तय आरोप में संशोधन के आदेश दिए हैं। साथ ही मामला फिर निचली अदालत में भेज दिया है। अदालत ने बरामद शराब में से केवल चार पेटी यानी 48 बोतल इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) रॉयल स्टैग को ही आरोप के दायरे में रखने के निर्देश दिए हैं।
मामला 15 नवंबर 2024 को पुलिस थाना संगड़ाह में दर्ज किया गया था। हरिपुरधार पुलिस ने हेलीपैड के पास गश्त के दौरान पिकअप की तलाशी ली। इस दौरान विभिन्न ब्रांड की शराब और बीयर की कई पेटियां बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि चालक रमेश कुमार के पास शराब के परिवहन के लिए विभाग का परमिट मौजूद नहीं था। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष वैध परिवहन परमिट पेश किया गया।
संशोधन याचिका में दलील दी गई कि निचली अदालत ने 2 जनवरी 2025 के आदेश में बरामद पूरी शराब के संबंध में आरोप तय कर दिए थे, जबकि वैध परमिट के तहत आने वाली अधिकांश शराब को अदालत पहले ही रिलीज करने का आदेश दे चुकी थी।
रिकॉर्ड के अनुसार वाहन से रॉयल स्टैग की 14 पेटियां बरामद हुई थीं, जबकि परमिट में 10 पेटियों के परिवहन की अनुमति थी। ऐसे में परमिट से अधिक चार पेटियां यानी 48 बोतल ही आरोप के दायरे में आती थीं।
न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने माना कि वाहन से बरामद अधिकांश शराब वैध परमिट के तहत थी। इसलिए हिमाचल प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत आरोप केवल निर्धारित मात्रा से अधिक ले जाई शराब के संबंध में ही बनता है। अदालत ने निचली अदालत को संशोधित आरोप तय कर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।