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सामान्य वैवाहिक विवाद मानसिक क्रूरता नहीं : कोर्ट

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क्रूरता और परित्याग के आरोप साबित नहीं, तलाक की याचिका खारिज
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वैवाहिक विवाद में पत्नी के पक्ष में सुनाया फैसला
पत्नी पर अलग रहने और झगड़ा करने के लगाए थे आरोप
तीन बेटियों की मां पर पति ने लगाया था झगड़ा करने का आरोप
दीपक मेहता

नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में फैमिली कोर्ट ने पति द्वारा दायर तलाक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पत्नी पर लगाए गए मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं हो सके। अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन के सामान्य विवादों को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।
सेना में कार्यरत रघुबीर ने पत्नी कला देवी के खिलाफ हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक की याचिका दायर की थी। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी परिवार से अलग रहने का दबाव बनाती थी, अक्सर झगड़े करती थी और बच्चों को लेकर अलग रहने चली गई।
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पति ने अदालत को यह भी बताया कि पत्नी ने उसके खिलाफ भरण-पोषण का मामला दायर कर वर्ष 2019 से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। साथ ही उसने आरोप लगाया कि पत्नी उसके माता-पिता का सम्मान नहीं करती थी। वहीं पत्नी ने अदालत में पति और ससुराल पक्ष पर बेटा न होने के कारण प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए। पत्नी का कहना था कि तीन बेटियां होने के बाद उसे ताने दिए गए और मारपीट की गई।
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति के दूसरी महिला से संबंध थे। इस संबंध में पंचायत स्तर पर समझौता भी हुआ था, जिसमें पति ने दूसरी महिला से संबंध न रखने और बच्चों के पालन-पोषण का खर्च उठाने का भरोसा दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत में पंचायत समझौता, पुलिस जीडी एंट्री और गवाहों के बयान पेश किए गए। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कपिल शर्मा ने पाया कि पति यह साबित नहीं कर पाया कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के घर छोड़कर गई थी।
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अदालत ने यह भी माना कि पत्नी बच्चों के साथ किराये के मकान में रह रही थी और मायके पक्ष की सहायता से अपना खर्च चला रही थी। फैसले में कहा गया कि वैवाहिक जीवन के सामान्य विवादों को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य न होने के कारण अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी।
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