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Sirmour News: बिन बर्फ चूड़धार की चोटियां इस साल दिख रहीं विरान

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बर्फ के बिना विरान पड़ी चूड़धार की चोटियां। संवाद
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सचित्र-
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बिन बर्फ चूड़धार की चोटियां इस साल दिख रहीं विरान
दिसंबर से लेकर अब तक न गिरे बर्फ के फाहे और न ही हुई बारिश
हर साल इस मौसम में 12 से 15 फुट तक चोटियों पर रहती थी बर्फ
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिपुरधार (सिरमौर)। समुद्र तल से 11,885 फुट की ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्थल चूड़धार की जो चोटियां दिसंबर से लेकर अप्रैल महीने तक बर्फ से ढकी रहतीं थीं, इस बार यह चोटिया बर्फ के बिना विरान सी दिख रहीं हैं। दिसंबर से लेकर फरवरी महीने तक चूड़धार में लगभग 12 से 15 फुट बर्फ जमी रहती है। इस बार इन चोटियों पर कहीं पर भी बर्फ नजर नहीं आ रही है।
इस सीजन में चूड़धार में अब तक दो बार ही हल्का हिमपात हुआ है। चूड़धार में सीजन का पहला हिमपात 15 अक्टूबर 2023 को हुआ था जबकि दूसरा व आखिरी हिमपात 30 नवंबर 2023 को हुआ था। दिसंबर महीने में वहां पर बर्फ का एक फाह तक नहीं गिरा है। जनवरी माह के भी 20 दिन निकल चुके हैं मगर बर्फबारी तो दूर की बात बारिश की भी बूंद तक नहीं गिरी है।
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गर्मी के दिनों में गहरा सकता है पेयजल संकट
आमतौर पर चूड़धार में सितंबर महीने से ही बर्फ गिरनी शुरू हो जाती है। यह सिलसिला अप्रैल महीने तक चलता है और चूड़धार की चोटियों व जंगलों में मई व जून तक बर्फ जमी रहती है। चूड़धार की चोटियों से शिमला व सिरमौर जिले की ओर कई छोटे-छोटे नाले निकलते हैं। गर्मी के दिनों में जब बर्फ पिघलती है तो इसका पानी इन नालों के माध्यम से इन दोनों जिले के सैकड़ों गांव की प्यास बुझाता है। यही नहीं इन नालों का पानी लोग सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। इस बार चोटी पर बर्फ न जमने के कारण गर्मी के दिनों में इन दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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बर्फबारी के लिए तरसा गिरिपार
जिले के गिरिपार क्षेत्र के हरिपुरधार, नौहराधार व गत्ताधार आदि क्षेत्रों में हर वर्ष दिसंबर से लेकर फरवरी माह तक भारी बर्फबारी होती है। इस बार पिछले करीब तीन महीने से क्षेत्र में न तो बारिश हो रही है और न ही क्षेत्र में अब तक बर्फबारी हुई है। बर्फबारी न होने से किसानों की लहसुन, गेहूं व जौ की फसल पीली पड़ने लगी है। मौसम ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में सेब आडू के कारोबार पर इसका असर देखने को मिल सकता है। बारिश और बर्फबारी नहीं होती है तो सेब के चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो पाएंगे, जिससे इस बार भी सेब उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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संवाद
मंदा पड़ा पर्यटन कारोबार

दिसंबर से लेकर मार्च महीने तक बर्फबारी देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक हरिपुरधार पहुंचते हैं। इस बार बर्फबारी न होने के कारण काफी कम संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं जिसके कारण पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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