सिरमौर के स्कूलों में अब नहीं दिखेगा जादू का शो
कागज कला कौशल से सजावटी वस्तुएं बनाने के प्रदर्शन पर भी लगा प्रतिबंध
उच्च शिक्षा उपनिदेशक ने स्कूल प्रभारियों को ऐसी अनुमति नहीं देने के दिए आदेश
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले की उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में अब कोई भी व्यक्ति जादू का शो दिखाकर बच्चों का मनोरंजन नहीं कर पाएगा। यही नहीं, स्कूलों में कागज कला कौशल से सजावटी वस्तुएं बनाने की कला का भी अब प्रदर्शन नहीं होगा।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक सिरमौर ने इस बारे में जिले की सभी उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के प्रभारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि वह स्कूलों में जादू का शो दिखाने और कागज कला कौशल से सजावटी वस्तुएं बनाने वाले किसी भी व्यक्ति को इसकी अनुमति नहीं दें।
गौरतलब रहे कि अब तक स्कूलों में जादू का शो और कागज कला कौशल का प्रदर्शन करके सजावटी वस्तुएं बनाने वाले व्यक्ति समय-समय पर अपनी कला का प्रदर्शन करते आ रहे थे। इससे जहां ऐसे व्यक्तियों की आजीविका चलने में मदद हो रही थी, वहीं बच्चों का भी खूब मनोरंजन हो रहा था।
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में जादू शो के आयोजन को लेकर तब बवाल मचा, जब चंद अर्से पहले प्रदेश के एक जिले के प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय से स्कूलों में जादू को मंजूरी दी गई। जारी पत्र में सरकारी स्कूलों में आयोजित जादू शो से अर्जित आय का 30 प्रतिशत हिस्सा मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के लिए कहा था।
यह पत्र सोशल मीडिया पर जारी होते ही विपक्षी पार्टी भाजपा ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में जादू शो के आयोजन की अनुमति को वापस लेने के आदेश जारी किए थे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी कहा था कि जादू के शो करना नई बात नहीं लेकिन इस तरह की आदेश जारी करने का अर्थ नहीं था। इस बारे में शिक्षा मंत्री ने उपनिदेशक से स्पष्टीकरण मांगते हुए भविष्य में इसे न दोहराने के भी निर्देश दिए थे।
अब, सिरमौर जिले के स्कूलों में जादू का शो और कागज कला कौशल का प्रदर्शन करके सजावटी वस्तुएं बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। उच्च शिक्षा उपनिदेशक ने स्कूल प्रभारियों को ऐसे किसी भी व्यक्ति को जादू का शो या कागज कला कौशल का प्रदर्शन कर सजावटी वस्तुएं बनाने की अनुमति नहीं देने के निर्देश जारी किए हैं।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक डॉ. हिमेंद्र बाली ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों की शैक्षणिक समय सारिणी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसे ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। स्कूलों के प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने को कहा गया है ताकि ऐसी गतिविधियां पढ़ाई में अवरोध पैदा न करें।
संवाद