नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देेशों पर गिरिपार की खतवाड़ माइन की डिमार्केशन को टीम पहुंची। ग्रामीणों ने देहरादून के खनन संचालक को माइन की शिकायत भेजी थी। जिसमें अवैध ढंग से वन भूमि में खनन कार्य से आसपास के रिहायशी मकानों व वन भूमि को क्षति का आरोप लगाया है। इसके बाद एनजीटी के आदेश मिलने पर राजस्व विभाग व वन विभाग की टीम डिमार्केशन के लिए पहुंची। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाएगी।
कहा जा रहा है कि एनजीटी की शिमला बैंच ने सुनवाई के दौरान विवादित खनन क्षेत्र की डिमार्केशन करवाने के आदेश दिए थे। आदेश मिलने पर डीआरओ नाहन जीवन सिंह नेगी, डीएफओ रेणुका सुशील कुमार व तहसीलदार पांवटा बिमल पोखरियाल वर्मा की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान याचिकाकर्ता तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ता भी मौजूद रहे। एनजीटी के आदेशों के बाद गिरिपार बनौर के खतवाड़ क्षेत्र में टीम शनिवार को पहुंची। यहां पर चूना पत्थर माइन क्षेत्र की राजस्व व वन विभाग की टीमों ने डिमार्केशन शुरू की। ग्रामीणों का आरोप था कि खतवाड़ क्षेत्र की माइन में नियमानुसार कार्य नहीं किया जा रहा है। वन विभाग की भूमि पर भी खनन किया जा रहा है।
खनन कार्य से निकलने वाला मलबा साथ लगती खड्ड में फेंक दिया जा रहा है। जिससे साथ लगते खतवाड़ गांव के रिहायशी मकानों पर असर दिखने लगा है। कई मकान बुरी तरह से दरकने लगे हैं। वन भूमि पर खनन की शिकायत की गई थी जिस पर एनजीटी ने संज्ञान लिया। ग्रामीणों ने ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट में खदान संचालक के खिलाफ याचिका दायर कर दी थी। एनजीटी ने यह मामला न्यायालय की शिमला पीठ को सौंप दिया है। इस मामले में न्यायालय ने डिमार्केशन के समय याचिकाकर्ता, बचाव पक्षों के वकीलों को भी उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे।
उधर, तहसीलदार बिमला पोखरियाल वर्मा ने बताया कि एनजीटी के आदेशों पर डिमार्केशन कर ली गई है। डिमार्केशन की रिपोर्ट विभाग के माध्यम से एनजीटी शिमला पीठ को भेज दी जाएगी।