श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति ने अनदेखी के लगाए आरोप
बोले, विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
संगड़ाह (सिरमौर)। श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति की बैठक ददाहू में संयोजक प्रताप सिंह तोमर और महासचिव संजय चौहान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विस्थापित होने वाले सैकड़ों परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। समिति ने बांध प्रबंधन पर जमीन खरीद मामले में भारी गड़बड़ी और विस्थापितों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं।
समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिल ने कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए खरीदी गई 418 बीघा भूमि पूरी तरह बेकार है, जहां खेती करना असंभव है। उन्होंने कहा कि 12 वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जमीन खरीद में गड़बड़ी की सतर्कता विभाग से जांच कराने के आदेश दिए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि इतने वर्षों बाद भी जांच अधर में लटकी है और कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
संघर्ष समिति अध्यक्ष ने बांध प्रबंधन पर सवालिया प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि विस्थापितों को टोकियो व सैनवाला में कॉलोनियां देने की बात कही जा रही है, जबकि खेती की जमीन अंबोया में दिखाई गई है। दोनों स्थानों की लगभग 40 किलोमीटर दूरी है। हैरान करने वाली बात यह है कि कॉलोनी टोकियो में और खेती करने विस्थापित जाएंगे अबोया, यह किस प्रकार संभव हो सकता है।
समिति ने दोहराया कि 15 वर्षों से मांग है कि विस्थापितों को किसी बड़े शहर चंडीगढ़ के समीप कॉलोनी बनाकर दी जाए, ताकि विस्थापितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर प्राप्त हो सकें।
समिति ने ग्राम तनोशी, मलाहण और अणू खुरकन की 6 एकड़ जमीन, जो डूब क्षेत्र में आती है को अभी तक अधिग्रहित न किए जाने पर नाराजगी जताई और इस जमीन को तत्काल अधिग्रहण कर उस समय की दरों के अनुसार मुआवजा देने की मांग की। इस दौरान मोहतू व चमयाणा के बीच पुल बनाने की पुरानी मांग को दोहराया गया।
समिति के संयोजक प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि पंचायत रिकॉर्ड के आधार पर बनाई जा रही विस्थापितों की सूची में वे परिवार शामिल नहीं किए गए, जिन्होंने अलग परिवार किया था या रोजगार के सिलसिले में बाहर थे। उन्होंने कहा कि बांध प्रबंधन की ओर से डाइवर्जन टनल बनाने की तैयारी तो की जा रही है लेकिन विस्थापितों की समस्याएं जस की तस हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संघर्ष समिति को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी बांध प्रबंधन की होगी।
बैठक में कोषाध्यक्ष हरिचंद शर्मा, सलाहकार राजकुमार शर्मा, टिकमाराम, बलबीर सिंह ठाकुर, गोविंद शर्मा, कपिल देव, सुभाष चंद्र, धर्म दत्त शर्मा, राजेंद्र सिंह, संदीप कुमार सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे।