नाहन (सिरमौर)। विकास खंड नाहन की मातर पंचायत के उपप्रधान और चार वार्ड सदस्यों को उपायुक्त सिरमौर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला प्रशासन ने सभी पदाधिकारियों से 10 दिन के भीतर नोटिस का जवाब मांगा है। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी साफ कहा कि यदि नोटिस का जवाब नहीं मिलता है तो सभी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जानकारी के अनुसार मात्तर पंचायत में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के अनुमोदन के लिए मई और जून माह में बैठकें बुलाई गई थीं। इस बारे में पंचायत सचिव ने ग्राम पंचायत के सभी जनप्रतिनिधियों को पहले ही अवगत करा दिया था लेकिन उपप्रधान व चार अलग-अलग वार्डों के सदस्य इन बैठकों से नदारद रहे। लिहाजा, न तो बैठक पूरी हो पाई, न ही जीपीडीपी प्लान का अनुमोदन हो पाया। अब ग्राम पंचायत मात्तर में भारत सरकार की ओर से विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि से वंचित होना पड़ेगा।
ग्राम पंचायत के विकास कार्य रुक जाएंगे। इसके लिए नोटिस में इन सभी को जिम्मेदार ठहराया गया है। इतना ही नहीं उपप्रधान को दिए नोटिस में उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि क्यों न इस पद को रिक्त समझा जाए। बता दें कि ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) प्लान के अनुमोदन के लिए 15, 21, 29 मई व 8 जून को ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की बैठकेें बुलाई गई थीं। आरोप है कि इन बैठकों में उपप्रधान भीमदत्त, वार्ड नंबर एक की सदस्य कमलेश कुमारी, वार्ड नंबर तीन के सदस्य यतेंद्र, वार्ड नंबर पांच की सदस्य छिमा देवी और वार्ड नंबर सात की सदस्य सवाला ने बैठकों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई। इस कारण मात्तर पंचायत के लिए जीपीडीपी प्लान का अनुमोदन नहीं हो सका। लगातार तीन बैठकों में उपस्थित न होने पर जिला प्रशासन ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 131 का उल्लंघन भी पाया।
इस पर उपायुक्त सिरमौर डॉ. आरके परूथी ने पंचायती राज अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन पांचों जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। उपायुक्त सिरमौर ने कारण बताओ नोटिस जारी करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नोटिस का जवाब 10 दिन के भीतर कार्यालय को प्रेषित करने को कहा है। अन्यथा एक तरफा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।