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नाहन अस्पताल के स्टोर से कुछ दवाओं को हटाया गया

Sat, 13 Feb 2016 06:16 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिरमाौर
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 डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं क्षेत्रीय अस्पताल से शनिवार को कुछ एक्सपायरी दवाएं आनन फानन में सरकारी डिस्पेंसरी से हटाई गई। ‘अमर उजाला’ में शनिवार को स्टोर में ही एक्सपायर हो गई लाखों की दवाएं खबर के प्रमुखता से छपने से स्वास्थ्य विभाग के स्टोर एवं डिस्पेंसरी से जुड़े कर्मचारियों ने उन दवाओं को वहां से हटा लिया।
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हालांकि सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि अस्पताल में फार्मासिस्ट एवं स्टोर इंचार्ज नीलम ने उन्हें बताया कि स्टोर में कोई भी दवा एक्सपायरी नहीं है। स्कैब्रूमा क्रीम जो कि एक जनवरी 2016 को एक्सपायर होनी थी वह पहले ही मरीजों को बांट दी गई है। जबकि स्मालफोलिक एसिड जो दिसंबर 2015 में एक्सपायर होनी थी उसका स्टाक भी समय से पहले ही समाप्त हो गया था। फिलहाल अस्पताल के स्टोर एवं डिस्पेंसरी में कोई भी एक्सपायरी दवा नहीं है।
सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि जिले के सभी दवा स्टोरों को तत्काल प्रभाव से आदेश जारी किए जा रहे हैं कि वह अपने-अपने अस्पतालों के दवा स्टोरों से दवाओं का विवरण संबधित बीएमओ को दें। उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में दवा अधिक मात्रा में पहुंचती है वहां से कुछ दवाओं को ऐसे अस्पतालों को भेजा जाता है जहां इसकी खपत ज्यादा है। स्टोरों में दवा का रखे रखे एक्सपायर होने का सवाल ही खड़ा नहीं होता।
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सिविल अस्पताल ददाहू में सिप्लोक्स सिरप की करीब 106 शीशियां अप्रैल 2016 को एक्सपायर हो जाएंगी, जो अभी स्टोर में हैं। जबकि एमोक्सी की 1500 टेबलेट व पैरासिटामोल की 2000 टेबलेट भी मई 2016 में एक्सपायर हो जाएंगी। अस्पताल प्रबंध का कहना है कि वह इनके एक्सपायर होने से पहले या तो रोगियों को वितरित कर देंगे या फिर इसकी सूचना विभाग को देंगे।

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ये दवाएं बिना रोगी के ही हो जाती हैं एक्सपायर
जिले के बड़े अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं के अलावा कई गंभीर रोगों की दवा भी उपलब्ध है। जैसे एचआईवी, एनेस्थीसिया जैसी कुछ दवाओं को लेने वाले रोगी बेहद कम होते हैं। ऐसे में अस्पतालों में उपलब्ध दवाएं रखे हुए ही एक्सपायर हो जाती हैं।
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पांवटा सिविल अस्पताल मेें नहीं होती दवाएं पूरी
सिविल अस्पताल पांवटा से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल को मिलने वाली जेनेरिक दवाइयां लगभग शत प्रतिशत वितरित हो जाती हैं। अस्पताल में पांवटा के अलावा शिलाई विस क्षेत्र के लोगों के आने से सरकारी दवा का स्टाक कभी कभार पूरा भी नहीं पड़ता।
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