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किशाऊ बांध परियोजना के सर्वेक्षण कार्य से पहले विरोध शुरू

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रोनहाट (सिरमौर)। हिमाचल और उत्तराखंड राज्य की सीमा में टौंस नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय किशाऊ बांध परियोजना का सर्वेक्षण कार्य आरंभ होने से पहले ही ग्रामीणों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने बांध क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे परियोजना महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर इसके निर्माण पर अपना एतराज दर्ज करवाया है।
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किशाऊ बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों का कहना है कि वह अपनी मां समान माटी को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उन्हें मरना मंजूर है लेकिन इस क्षेत्र से विस्थापित होकर पुनर्वास के लिए वो कभी तैयार नहीं होंगे।
किशाऊ बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष मातबर सिंह तोमर, मोहर सिंह चौहान, रूप सिंह तोमर, उदय भारद्वाज, लाखी राम, ज्ञान प्रकाश, चमेल सिंह, जगत सिंह, अनिल भारद्वाज, वीरेंद्र सिंह, पितांबर सिंह, रूपराम, नरेंद्र सिंह, संदीप, सूरत सिंह, गुुमान सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि सरकार चाहती है कि हिमाचल और उत्तराखंड क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को विस्थापित करके किशाऊ बांध का निर्माण करवाया जाए, जो क्षेत्र के लोगों को मंजूर नहीं है।
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उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि अगर किशाऊ बांध का निर्माण अति आवश्यक है तो इसे इस तरीके से बनाया जाए ताकि ग्रामीणों के घर और उनकी उपजाऊ जमीन को बचाया जा सके। किशाऊ बांध परियोजना के महाप्रबंधक डीके गर्ग ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों ने उन्हें एक ज्ञापन के माध्यम से अपनी सभी मांगों से अवगत करवाया है, जिसे वो अपने उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बहुउद्देशीय किशाऊ बांध परियोजना की डीपीआर तैयार करने का काम किया जा रहा है। निर्माण की प्रक्रिया इसके बाद शुरू होनी है। परियोजना की जांच और सर्वेक्षण संबंधित गतिविधियों में उन्हें सभी ग्रामीणों का सहयोग प्राप्त होगा ऐसा उनका मानना है। बता दें कि वर्ष 2008 में जब इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था तो उस समय इसके निर्माण में आने वाला कुल खर्च करीब 10 हजार करोड़ अनुमानित किया गया था जिसे वर्ष 2018 में बढ़ाकर 11 हजार 500 करोड़ किया गया था। वर्तमान में किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण के लिए 15 हजार करोड़ की अनुमानित लागत के आधार पर डीपीआर बनाने का कार्य किया जाना है।
किशाऊ बांध से हिमाचल प्रदेश के 8 गांव और उत्तराखंड के 9 गांव सहित दोनों राज्यों के 14 उपगांव जलमग्न हो जाएंगे। बांध बनने से हिमाचल और उत्तराखंड राज्य की कुल 2950 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आएगी। 660 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता वाले इस बांध की ऊंचाई लगभग 236 मीटर होगी।
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