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Sirmour News: दून पांवटा क्षेत्र में बाढ़ से ठप पड़ीं सिंचाई योजनाएं

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दून पांवटा क्षेत्र में बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त हुई सिंचाई योजना। संवाद
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किसानों को बुआई की सताने लगी चिंता
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क्षतिग्रस्त योजनाओं का प्राक्कलन तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा : अधिशाषी अभियंता
संवाद न्यूज एजेंसी

पुरुवाला (सिरमौर)। दून पांवटा क्षेत्र में हाल ही में भारी बारिश से आई बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तौरिया, गेहूं, सब्जियों और चारे की बुआई के लिए पानी की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन नदी तटवर्ती इलाकों में स्थापित दर्जनों सिंचाई योजनाएं अभी बहाल नहीं हो पाई हैं।

जानकारी के अनुसार बाढ़ की मार से बांगरण, शमशेरगढ़, डोबरी सालवाला, किलौड़, बढ़ाना, नवादा, मानपुर देवड़ा, राजबन और सूरतगढ़ जैसी कई सिंचाई योजनाएं पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गईं। इनके ठप होने से नई फसलों की बुआई के लिए खेत तैयार करना मुश्किल हो रहा है। इसी सितंबर माह में मक्की की कटाई के तुरंत बाद किसान तौरिया, सरसों और हरी सब्जियों की बुआई में व्यस्त हो जाते थे, लेकिन इस बार बिना सिंचाई के असमंजस में हैं।
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स्थानीय किसान गीताराम, मोहन सिंह, आत्माराम, राजू, रमेश, नरेश, बालकिशन आदि का कहना है कि वे महंगे दामों पर बीज तो खरीद लेंगे, लेकिन सिंचाई व्यवस्था न होने से फसलें उगाना बेहद कठिन होगा। यही वजह है कि किसान राहत और मुआवजे को लेकर सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। मैदानी क्षेत्र होने के चलते यहां पानी की अधिक मांग रहती है। अधिकतर किसान सिंचाई योजनाओं पर निर्भर हैं।
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वहीं, जलशक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि क्षतिग्रस्त योजनाओं का आंकलन कर प्राक्कलन तैयार कर मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। बजट स्वीकृत होते ही इन योजनाओं को पुन: संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल यमुना, गिरि और टोंस नदियों के किनारे स्थापित ज्यादातर सिंचाई परियोजनाएं बंद पड़ी हैं।
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