सतौन (सिरमौर)। कोरोना संकट के बीच खनन ढुलाई में लगे ट्रक ऑपरेटरों को झटका लगा है। उद्योग विभाग ने चूना पत्थर के वजन पर फीस दोगुनी कर दी है। अब चूना पत्थर का वजन 40 रुपये की जगह 80 से 100 रुपये में होगा। इससे ऑपरेटरों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। राजबन, हेवना, रेणुकाजी और राजपुर में चार खनन चौकियां स्थापित की गई हैं। यहां पर खनिज की जांच होती है। एम फॉर्म की जांच कर खनिज का वजन किया जाता है। वजन करने के लिए विभाग ने निजी मालिकों के कांटे लगवाए हैं। कांटा मालिक भार तोलने की एवज में प्रति ट्रक 40 रुपये वसूल करता है। कांटा मालिक 20 फीसदी कमीशन सरकार को देते हैं। अब सरकार ने कांटा मालिकों को कोरोना काल में राहत दे दी है। लेकिन राहत देने के लिए सरकार ने खनन व्यवसायियों की जेब को ढीला कर दिया है। विभाग ने 25 टन के भार पर 40 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और 25 टन से ज्यादा भार पर 100 रुपये प्रति ट्रक फीस तय कर दी है। अब 20 फीसदी के अनुसार सरकारी खजाने में 16 रुपये से 20 रुपये प्रति ट्रक जाएगा। सरकार को प्रति ट्रक 8 से 12 रुपये का लाभ मिलेगा। ट्रांसगिरि ट्रक ऑपरेटर सोसायटी के अध्यक्ष खत्री ठाकुर का कहना है कि सरकार ने खनन से जुड़े ट्रक संचालकों पर इसका असर पड़ेगा। जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने कहा कि कांटा मालिकों की कई दिनों से रेट बढ़ाने की मांग थी। अब इसमें इजाफा हुआ है। इससे सरकारी राजस्व को भी फायदा मिलेगा। इसकी सूचना दे दी गई है।
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बिना जांच जा रहा क्रशर
सरकार का चूना पत्थर खनन के लिए हमेशा सौतेला व्यवहार रहा है। जहां चूना पत्थर पर विभाग की जिले में चार खनन पड़ताल चौकी हैं। जबकि रेत-बजरी और क्रशर पर विभाग की एक भी खनन पड़ताल चौकी नहीं है। चूना पत्थर लेकर जा रहे वाहनों की चैकिंग होती है। लेकिन क्रशर से जाने वाली सामग्री की जांच-पड़ताल नहीं होती है।