ग्राउंड रिपोर्ट -
आपदा के बाद लोगों को सता रहा डर
बारिश में हो सकता है खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरुवाला (सिरमौर)। बांगरण-शमशेरगढ़ में आपदा के बाद गिरि नदी के तटीकरण की बात की गई थी, लेकिन आपदा के पांच माह बीत जाने के बाद भी यहां हालत ज्यों की त्यों है। क्षेत्र के विधायक की ओर से गिरि नदी के तटीकरण के लिए घोषित 40 लाख रुपये का ऐलान किया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया।
बता दें कि बरसात के दौरान क्षेत्र में गिरि नदी ने काफी तबाही मचाई थी। लोगों के रिहायशी घरों को जहां नुकसान हुआ था वहीं रास्तों, सड़कों और उपजाऊ भूमि को भी यहां काफी नुकसान हुआ था। आपदा के बाद प्रभावित गांवों का दौरा करने पहुंचे विधायक ने कहा था कि आपदा पीड़ितों को केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने शमशेरगढ़-बांगरण से सटे गिरि नदी के तटीकरण की घोषणा भी की थी। साथ ही जलशक्ति विभाग की करोड़ों रुपये की क्षतिग्रस्त योजनाओं के पुनर्निर्माण के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी।
हालांकि, जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। तटीकरण का कार्य शुरू न होने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और निराशा है। लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं और हर बरसात में दोबारा आपदा का डर सताने लगा है।
ग्रामीणों लाल सिंह, विक्रम सिंह, मान सिंह, देवराज, कृष्ण, नरेंद्र, मोती राम, मेहर सिंह, नासिर, राजीव, नरेश, सुरेश, रेणु शर्मा, कांता, अन्नू आदि ने सरकार से मांग की है कि घोषित बजट को जल्द मंजूरी देकर तटीकरण का कार्य तुरंत शुरू किया जाए, ताकि लोगों को वास्तविक राहत मिल सके और वे भय के माहौल से बाहर आ सकें।
उधर, जलशक्ति विभाग पांवटा साहिब के अधिशाषी अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि गिरि नदी तटीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार है और जैसे ही बजट का प्रावधान होता है, कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं, विधायक सुखराम चौधरी ने कहा कि गिरि नदी तटीकरण उनकी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट स्वीकृति में देरी के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है, लेकिन सरकार से लगातार संपर्क में हैं और बजट मिलते ही काम प्रारंभ कराया जाएगा। विधायक ने कहा कि वे आपदा प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ेंगे और क्षेत्र को स्थायी सुरक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहेंगे।
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बांगरन-शमशेरगढ़ में आपदा के बाद यहां होना था गिरिनदी का चेनेलाइजेशन। संवाद