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Sirmour News: सर्दियों और गर्मियों में गिरि विद्युत परियोजना में गिरता है जलस्तर

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टौंस सहित अन्य नदियाें में प्रचूर मात्रा में पानी, अपनी योजना हो सकती है स्थापित
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। सिरमौर की एकमात्र विद्युत उत्पादन गिरि परियोजना में सर्दियों और गर्मियों में उत्पादन गिरना शुरू हो जाता है। कई बार तो सिल्ट आदि के चलते बरसात में भी योजना प्रभावित रहती है। जिले में बड़ी नदियां और पानी पर्याप्त होने के बावजूद भी बिजली के लिए बाहरी राज्यों व जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसी का एक उदाहरण टौंस नदी है। हिमाचल की टौंस नदी से उत्तराखंड सरकार को करोड़ों की बिजली मिल रही है। यदि समय पर हिमाचल में इस नदी पर योजना स्थापित होती तो आज हिमाचल में विद्युत उत्पादन बढ़ता। आलम यह है कि सिरमौर में विद्युत की कमी को पूरा करने को लेकर उत्तराखंड से बिजली खरीदी जाती है। इसे पानी की रॉयल्टी से पूरा किया जाता है।
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बता दें कि यहां से निकलने वाली टौंस नदी के पानी से उत्तराखंड राज्य में पांच पावर हाउस स्थापित हैं। इससे उत्तराखंड सरकार बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन कर रही है। बताया जा रहा है कि 1962 के दशक में हिमाचल प्रदेश सरकार ने टौंस नदी के छिबरो क्षेत्र में बिजली उत्पादन के लक्ष्य को लेकर काम शुरू किया था। छिबरो में बांध लगाकर 6 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जाना था। विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर जाकर पाया कि टौंस नदी के हिमाचल के छोर पर जहां सुरंग का निर्माण किया जाना था वहां के पहाड़ की मिट्टी ज्यादा नर्म होने पर सुरंग निर्माण के लिए पहाड़ उपयुक्त नहीं है। जबकि नदी के उत्तराखंड की ओर के पहाड़ में पक्की चट्टान पाई जाने पर दोनों राज्यों की सरकारों की सहमति से नदी का रुख सुरंग निर्माण कर उत्तराखंड को सौंप दिया।
उत्तराखंड सरकार ने पहली विद्युत परियोजना छिबरो में स्थापित कर 60 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू किया। वहीं, दूसरी विद्युत परियोजना में 10 मेगावाट और विकास नगर के ढालीपुर में 17 मेगावाट और ढकरानी में 11 मेगावाट के बाद कुल्हाल में 10 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता की परियोजना शुरू की गई। इसके साथ टौंस नदी पर 5 परियोजना के द्वारा रोजाना 240 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है।
सिरमौर जिले में संचालित परियोजना में गर्मियां शुरू होते ही विद्युत उत्पादन 60 प्रतिशत तक कम हो रहा है। जिला में विद्युत की खपत ज्यादा होने पर विद्युत बोर्ड को उत्तराखंड में हो रहे विद्युत उत्पादन से मिलने वाली रॉयल्टी पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार सिरमौर में विद्युत की खपत 4 हजार मेगावाट तक रहती है। इस साल के शुरू में ही विद्युत उत्पादन घटने से 3500 मेगावाट बिजली बाहर से लेनी पड़ रही है। इसमें ज्यादातर बिजली उत्तराखंड के खोदरी विद्युत बोर्ड से पुरी की जाती है। इसी प्रकार हिमाचल की टौंस नदी के पानी से अगर हिमाचल में विद्युत उत्पादन होता तो हिमाचल को करोड़ों रुपये की आमदनी हो सकती थी।
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वहीं, गिरिनगर विद्युत परियोजना के आरई अजय चौधरी ने बताया कि ज्यादातर विद्युत आपूर्ति उत्तराखंड से पूरी की जाती है और सोलन से भी जरूरत पड़ने पर आपूर्ति लेनी पड़ रही है।
संवाद
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