ग्राउंड रिपोर्ट
अनाज की खेती छोड़ हाईब्रिड सफेदा और पापुलर की ओर बढ़ रहा रुझान
इस साल लगभग एक हजार किसानों ने दस लाख सफेदा के लगाए पौधे
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। विकास खंड पांवटा साहिब के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में किसान जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं के आतंक से परेशान हैं। हाल यह है कि जंगल के साथ लगती जमीनों पर किसान अनाज उगाना छोड़ चुके हैं और अब खेती में अन्य विकल्प तलाश रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यहां अनाज और सब्जियों का कारोबार घाटे का सौदा बनता जा रहा है। महंगे खाद, बीज और दवाइयों की खरीद के बावजूद साल दर साल फसलों के उत्पादन में भारी कमी देखी जा रही है। पांवटा विकास खंड में कृषि क्षेत्र लगभग 18 हजार हेक्टेयर भूमि में फैला है, लेकिन जंगली जानवरों के प्रकोप के कारण फसलें लगातार प्रभावित हो रही हैं। वर्तमान में गेहूं लगभग 5-6 इंच तक बढ़ चुका है, लेकिन रात में नीली गाय और दिन में बंदर तथा लावारिस पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पांवटा क्षेत्र के चारों ओर वन क्षेत्रों की उपस्थिति से जंगली जानवरों द्वारा फसलें भारी प्रभावित हो रही हैं।
क्षेत्र के पडदूनी, धौलाकुआं, खारा, जगतपुर, बहराल और खोड़ोवाला के किसान रात-रातभर जागकर खेतों की सुरक्षा कर रहे हैं। पुरुवाला निवासी रवि चौधरी ने बताया कि जंगल से रात में नीली गाय और दिन में बंदर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान देवेंद्र चौधरी, रामेश्वर चौधरी और देशराज शर्मा ने बताया कि अधिकतर किसानों ने खेती छोड़कर हाईब्रिड सफेदा और पापुलर लगाना शुरू कर दिया है। अनुमानित तौर पर इस साल लगभग एक हजार किसानों ने दस लाख सफेदा के पौधे लगाए हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सफेदा की फसल अधिक पानी लेती है और इसमें एक पेड़ 20 लीटर तक पानी सोखता है। इससे भूमि बंजर होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, खेती छोड़ चुके किसानों का कहना है कि सफेदा पांच साल में तैयार हो जाता है और इससे एक बीघा जमीन से लगभग पांच लाख रुपये की आमदनी हो सकती है, जबकि पारंपरिक खेती से परिवार का पालन करना कठिन हो गया है।