संवाद न्यूज एजेंसी -1
नाहन (सिरमौर)। ट्रायल कोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक मामले में पत्नी के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए पति को 10,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह राशि आवेदन दायर किए जाने की तिथि से प्रभावी होगी और मुख्य याचिका के अंतिम निपटारे तक देय रहेगी।
यह मामला उपमंडल राजगढ़ क्षेत्र में संध्या बनाम ऋषि गोयल का है। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद पति और उसके परिवार ने उसके साथ मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना की। उसे वैवाहिक घर से निकाल दिया गया और उसके भरण-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की गई। याचिका में पति की मासिक आय एक लाख रुपये से अधिक बताते हुए 20 हजार प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की गई थी। वहीं, पति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पत्नी स्वयं घर छोड़कर गई है। उसने दावा किया कि उसकी आय बहुत कम है और पत्नी भी नौकरी कर रही है, इसलिए उसे अंतरिम भरण-पोषण का अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से दाखिल आय एवं संपत्ति संबंधी हलफनामों का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि पत्नी वर्तमान में कार्यरत होने के बावजूद उसकी आय वैवाहिक जीवन के स्तर के अनुरूप नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि सक्षम एवं स्वस्थ व्यक्ति होने के नाते पति अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु सिन्हा ने आदेश में कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम का उद्देश्य आर्थिक अभाव से पीड़ित महिला को तत्काल राहत उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पत्नी के आर्थिक निर्वाह के लिए 10,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया गया।-