बिना लाइसेंस गलत दिशा में कार चलाकर बाइक को मारी टक्कर, चालक को छह माह की जेल
-आंबवाला पौड़ीवाला मोड़ पर बाइक को टक्कर मारकर दो लोगों को किया था घायल, 2000 रुपये जुर्माना भी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। आंबवाला पौड़ीवाला मोड़ पर गलत दिशा में कार चलाकर मोटरसाइकिल को टक्कर मारने और दो लोगों को घायल करने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नाहन उपासना शर्मा की अदालत ने अक्षय कश्यप को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे अधिकतम छह माह के साधारण कारावास के साथ कुल 2000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार 20 अप्रैल 2021 को सुबह करीब 10:15 बजे कमल कुमार अपनी पत्नी प्रमिला के साथ मोटरसाइकिल नंबर एचपी-17बी-5906 पर बरमा पापड़ी में अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे। आंबवाला पौड़ीवाला मोड़ के पास कार नंबर एचपी-71-9315 गलत दिशा में आई और उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में कमल कुमार और प्रमिला घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकीय रिपोर्ट में एक चोट साधारण और दूसरी गंभीर प्रकृति की पाई गई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर उनका यांत्रिक निरीक्षण करवाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 13 गवाह पेश किए। प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपी की पहचान कार चालक के रूप में की। घायल कमल कुमार और प्रमिला ने भी कार के तेज गति से गलत दिशा में आने और बाइक को टक्कर मारने की बात कही। अदालत ने माना कि मोड़ पर कार को गलत दिशा में ले जाना लापरवाही को दर्शाता है।
जांच के दौरान अक्षय कश्यप अपना ड्राइविंग लाइसेंस पुलिस के समक्ष पेश नहीं कर सका और न ही सुनवाई के दौरान वैध लाइसेंस होने का प्रमाण दिया गया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 338 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 के तहत दोषी ठहराया।
सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी के पहली बार अपराधी होने और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के आधार पर परिवीक्षा का लाभ देने की मांग की। अदालत ने कहा कि अपराध का कृत्य मानव जीवन को खतरे में डालने वाला था और ऐसे मामले में परिवीक्षा देने से समाज में गलत संदेश जा सकता है।
अदालत ने धारा 279 और 337 में तीन-तीन माह का साधारण कारावास व 500-500 रुपये जुर्माना, धारा 338 में छह माह का साधारण कारावास व 500 रुपये जुर्माना तथा धारा 181 में 500 रुपये जुर्माना लगाया। सभी कारावास की सजाएं एक साथ चलेंगी।
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मुआवजा राशि का 50 फीसदी जारी करने के आदेश
अदालत-2
नाहन। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण-प्रथम, सिरमौर के पीठासीन अधिकारी अजय मेहता ने नर्दा देवी बनाम एचडीएफसी एर्गो मामले में आवेदिका को मुआवजा राशि का 50 फीसदी हिस्सा ब्याज सहित जारी करने के आदेश दिए हैं। नर्दा देवी ने एमएसी याचिका संख्या 42/2022 में दिए गए अंतिम अवार्ड के तहत अपने हिस्से की राशि जारी करने के लिए आवेदन किया था। बीमा कंपनी ने आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। सिविल नाजिर की रिपोर्ट के अनुसार एफडीआर संख्या 18 के तहत 13,21,255 रुपये अधिकरण में जमा हैं। अधिकरण ने अंतिम अवार्ड के अनुरूप मूल मुआवजा राशि का 50 फीसदी और उस पर अर्जित ब्याज जारी करने के निर्देश दिए। राशि सत्यापन के बाद आवेदिका के बैंक खाते में भेजी जाएगी। संवाद
अफीम की खेती के आरोप में पिता-पुत्र बरी, कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ
अदालत-3
नाहन। जिला की एक विशेष अदालत ने अफीम की अवैध खेती के आरोपी पिता-पुत्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश-II गौरव महाजन की अदालत ने सुनाया। मामला राजगढ़ पुलिस थाना के तहत आने वाले गांव पलाशला का है, जहां 18 अप्रैल 2023 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दो खेतों से कुल 1539 अफीम के पौधे बरामद किए थे। पुलिस ने इस मामले में खेत के संयुक्त मालिकों में शामिल गीता राम और उनके बेटे गंगू राम के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 और 29 के तहत मामला दर्ज कर गंगू राम को गिरफ्तार किया था। अदालत में सुनवाई के दौरान राजस्व रिकॉर्ड से यह साफ हुआ कि जिस भूमि पर अफीम उगाई गई थी, वह सांझी (संयुक्त) जमीन थी और उसके 8 से 9 सह-मालिक थे। जमीन का कानूनी रूप से कोई विभाजन नहीं हुआ था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि उस जमीन पर विशेष रूप से इन दोनों आरोपियों का ही कब्जा था और खेती उन्होंने ही की थी। संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। संवाद
आरोपी को कोर्ट में पेश न करने पर जमानतदार पर 500 रुपये जुर्माना
अदालत-4
नाहन। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नाहन उपासना शर्मा की अदालत ने आरोपी को अदालत में पेश नहीं करने के मामले में जमानतदार के खिलाफ धारा 446 सीआरपीसी के तहत शुरू कार्यवाही का निपटारा कर दिया। 8 जून 2026 को आरोपी की गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी होने के साथ कार्यवाही शुरू की गई थी। जमानतदार ने जवाब में कहा कि आरोपी बीमार होने के कारण अदालत में उपस्थित नहीं हो सका और वह अपने अधिवक्ता को भी सूचना नहीं दे पाया। हालांकि, जवाब शपथपत्र से समर्थित नहीं था। अदालत ने इसे पर्याप्त आधार नहीं माना। जमानतदार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने 500 रुपये जुर्माना लगाया तथा जब्त राशि पर ब्याज माफ कर दिया। जुर्माने की राशि कोषागार में जमा कराने के आदेश दिए गए। संवाद
अदालत-5
चेक बाउंस मामले में 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत
नाहन। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी बाबू राम को चार लाख रुपये की मुआवजा राशि का 20 फीसदी जमा करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। शिलाई की जेएमएफसी अदालत ने बाबू राम को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और चार लाख रुपये मुआवजे की सजा सुनाई थी। 22 जुलाई 2026 को अपीलीय अदालत ने सजा के आदेश के संचालन पर रोक लगाते हुए 20 फीसदी राशि दो माह में जमा करने और 20 हजार रुपये के निजी व जमानती मुचलके भरने के निर्देश दिए थे। गंभीर बीमारी के कारण अनुपालन नहीं होने पर अदालत ने 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी। संवाद