-ग्रामीणों ने हाई कोर्ट में दायर की याचिका -30 वर्षों से लगातार है आरक्षित हैं पंचायत
संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर) जिला सिरमौर की डिलमन ग्राम पंचायत के लगातार 30 वर्षों से आरक्षित रहने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पंचायत को अनारक्षित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि डिलमन पंचायत वर्ष 1995 से लेकर 2026 तक लगातार आरक्षित रही है, जिसके चलते सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इस मुद्दे को लेकर पंचायत के प्रतिनिधियों ने न्यायालय में याचिका दायर की है।
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जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2026 को पंचायतीराज विभाग के सचिव की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि जो पंचायतें लगातार दो बार आरक्षित रही हैं, उन्हें अनारक्षित किया जाएगा। इसके बावजूद डिलमन पंचायत को एक बार फिर आरक्षित कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में रोष है। इस संबंध में 6 अप्रैल को पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें पूर्व पंचायत समिति सदस्य ओम प्रकाश शर्मा, इंद्र कुमार, ओम दत्त, रमेश दत्त और योगेश कुमार शामिल थे, उपायुक्त सिरमौर से भी मिला था।
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के समक्ष पंचायत के लगातार आरक्षित रहने का मुद्दा उठाया था। याचिकाकर्ता ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि डिलमन पंचायत को लगातार सातवीं बार आरक्षित किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सामान्य वर्ग को कब मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का विरोध नहीं है, लेकिन किसी एक पंचायत को बार-बार आरक्षित करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि 6 अप्रैल को जारी रोस्टर में डिलमन पंचायत अनुसूचित वर्ग पुरुष के लिए आरक्षित थी, जबकि 7 अप्रैल को संशोधित रोस्टर में इसे महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। संवाद