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Sirmour News: करोड़ों का व्यापार करने वाली चर्खियों से मार्किट फीस वसूलने की मांग

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जिले में 25 से अधिक गुड़-शक्कर बनाने वाली चर्खियां : तरसेम
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बाहरी राज्यों के ठेकेदारों से सरकार, एपीएमसी को नहीं मिलता कोई भी राजस्व
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। जिला सिरमौर में दो दर्जन से अधिक गुड़, शक्कर तैयार करने वाली चर्खियां संचालित हो रही हैं। इनका हर वर्ष सीजन में करोड़ों का व्यापार होता है। लेकिन, इनसे कोई मार्किट फीस नहीं वसूली जाती है। इससे प्रदेश सरकार व कृषि उपज मंडी समिति सिरमौर को एक रुपये का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
भारतीय किसान यूनियन (चड़ूनी) प्रदेश इकाई ने प्रदेश सरकार से इन चर्खियों को भी मार्किट फीस वसूलने के दायरे में लाने का प्रस्ताव भेजा है। इससे प्रदेश सरकार व मंडी समितियों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
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भारतीय किसान यूनियन (चड़ूनी) के प्रदेश अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी, महासचिव गुलजार सिंह, सचिव हरजीत सिंह व किसान नेता गुरविंदर सिंह गोपी ने कहा कि हर वर्ष पांवटा साहिब क्षेत्र के किसान करीब एक लाख क्विंटल गन्ना उत्तराखंड की डोईवाला शूगर मिल को भेजते हैं। जबकि डेढ़ से दो लाख क्विंटल गन्ना दो दर्जन से अधिक गुड़, शक्कर तैयार करने वाली चर्खियों में बेचा जाता रहा है। ये चर्खियां शिवपुर, भुंंगरनी, बहराल-पातलियों, सूरजपुर, पांवटा विधानसभा क्षेत्र के गिरिपार क्षेत्रों में संचालित होती हैं जो स्थानीय किसानों से गन्ना खरीद कर गुड़ व शक्कर तैयार करके बेचते हैं। हर वर्ष करोड़ों का लाभ कमाते हैं। लेकिन, प्रदेश सरकार को किसी तरह का मार्किट फीस नहीं मिल पा रही है। भाकियू प्रदेश इकाई ने प्रदेश सरकार, एपीएमसी प्रदेश निदेशक तथा एपीएमसी सिरमौर चेयरमैन से इन चर्खियों को भी एक फीसदी मार्किट फीस के दायरे में लाने पर विचार करने का आग्रह किया है। इसके लिए एक मसौदा तैयार किया जाए। इसमें मार्किट कमेटी के माध्यम से गन्नेे की खरीद हो और एक फीसदी मार्किट फीस वसूल कर आगे इन चर्खियों के संचालकों को गन्ना बेचा जाए। ऐसा करके हर सीजन में प्रदेश सरकार व एपीएमसी की लाखों की आय हो सकेगी। इसके लिए मंडी समिति के साथ एक बैठक शीघ्र ही रखी जाएगी।
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सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव : सीताराम
कृषि उपज मंडी समिति सिरमौर के अध्यक्ष सीताराम शर्मा ने कहा कि किसान संगठनोंं से इस तरह की मांग उठी है। स्थानीय किसान संगठनों के साथ बैठक में चर्चा करने के बाद इस बारे में एक प्रस्ताव प्रदेश सरकार व निदेशक हिमाचल प्रदेश को भेजा जाएगा।
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