-बैंकों ने 2,752 ऋणी किसानों को जोड़ा लेकिन जिले में सिर्फ 12 किसानों ने कराया स्वेच्छा से बीमा
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। मौसम और फसल रोगों की मार झेल रहे सिरमौर के किसानों ने फसल बीमा योजना से दूरी बनाए रखी। जिलेभर में बैंकों ने ऋण लेने वाले 2,752 किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ा, लेकिन इसके अलावा अपनी इच्छा से योजना का लाभ लेने के लिए महज 12 किसानों ने ही पंजीकरण कराया। ऐसे में फसलों को हुए नुकसान के बावजूद बड़ी संख्या में किसान बीमा सुरक्षा से बाहर हैं।
इस वर्ष जिले में लगभग सभी प्रमुख फसलें मौसम और विभिन्न रोगों की चपेट में आई हैं। सीजन की शुरुआत में मक्की की फसल में सुंडी रोग लगने से पैदावार प्रभावित हुई। इसके बाद धान की फसल में बोना रोग के कारण करीब 30 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। वहीं, ऊपरी क्षेत्रों में टमाटर और अदरक की फसलें भी बीमारी की चपेट में आने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
विभाग के अनुसार, यदि किसानों ने फसल का बीमा कराया होता तो निर्धारित प्रावधानों के तहत नुकसान की भरपाई का लाभ मिल सकता था। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार ददाहू में बैंकों ने 289 किसानों को योजना से जोड़ा, जबकि तीन किसानों ने स्वेच्छा से बीमा कराया। हरिपुरधार में एक किसान ने बीमा कराया। कमरऊ में 141 किसानों को बैंकों के माध्यम से योजना से जोड़ा गया, जबकि तीन किसानों ने स्वयं बीमा कराया। नाहन में बैंकों ने 433 किसानों का पंजीकरण कराया, जबकि तीन किसानों ने स्वेच्छा से बीमा करवाया।
इसी तरह पच्छाद में 20 किसानों को बैंकों ने योजना से जोड़ा। पांवटा क्षेत्र में बैंकों के माध्यम से 1,711 किसानों को योजना से जोड़ा गया, जबकि तीन किसानों ने स्वयं बीमा कराया। रेणुका में पांच और रोहनाट में नौ किसानों का बैंक स्तर पर बीमा कराया गया। शिलाई में भी बैंकों ने 150 किसानों को योजना से जोड़ा, जबकि इन क्षेत्रों में किसी किसान ने स्वेच्छा से बीमा नहीं कराया।
फसलों को नुकसान होने के बाद किसान मुआवजे की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन फसल बीमा योजना से जुड़ने पर ही निर्धारित शर्तों के अनुसार नुकसान की भरपाई का लाभ मिल सकता है।
कृषि विकास अधिकारी धौलाकुआं रश्मी भटनागर ने बताया कि फसल बीमा के लिए पंजीकरण कराने को लेकर पोर्टल 31 अगस्त तक खुला था। इसके बाद जिले से अपनी इच्छा से केवल 12 किसानों ने ही योजना के तहत पंजीकरण कराया है।
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