अगस्त महीने में सिरमौर ताल में मृत मिले बबली और नेत्र की मृत्यु जहर खाने से हुई थी। पुलिस के पास पहुंची फारेंसिक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है, लेकिन दोनों मृतकों के परिजन इससे असंतुष्ट है। लिहाजा, उन्होंने सीआईडी से जांच करवाने की मांग की है। जिला पुलिस ने भी मामला सीआईडी को ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। वीरवार को एसपी ने दोनों के परिजनों को पांवटा थाना में बुलाकर फांरेसिक लैब से आई रिपोर्ट सौंपी।
अगस्त महीने में सिरमौरी ताल में बबली और नेत्र के शव बरामद हुए थे। दोनों की मृत्यु संदिग्ध थी। लिहाजा पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मौत की वजह पानी में डूबना बताया गया था, लेकिन अब फारेसिंक रिपोर्ट से इस मामले में नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों की मौत जहर खाने की वजह से हुई थी। लिहाजा, परिजन असमंजस की स्थिति में है।
पांवटा थाने में पहुंचे दोनों मृतकों के परिजनों ने साफ किया कि वह पुलिस जांच से कतई संतुष्ट नहीं है। पहले मौत की वजह पानी में डूबना बताया गया और अब जहर खाना बताया जा रहा है। क्या सही है और क्या गलत उनकी समझ से परे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान परिजनों और पुलिस के बीच बहस भी हुई जिस पर परिजनों ने आक्रोश व्यक्त किया है। परिजनों का कहना है कि इस मामले की जांच सीआईडी से करवाई जाए।
उन्होंने अब आंदोलन की भी चेतावनी दी है। सतौन एवं शिलाई के ग्रामीण तथा मृतक नेत्र सिंह की बहन बबीता, भाई अनिल तथा मृतक बबली के बड़े भाई रमेश देसाई पांवटा थाना में एसपी सिरमौर सौम्या सांबशिवन से मिले। एसपी ने परिजनों को जो रिपोर्ट सौंपी। उसमें दोनों की मौत का कारण जहर खाना बताया गया। गत 24 अगस्त को इससे पहले आईजीएमसी से मिली रिपोर्ट में दोनों की मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया था।
एसपी सौम्या सांबशिवन ने बताया कि पोस्टमार्टम और विसरा की रिपोर्ट अलग-अलग हो जाती है। कई बार पोस्टमार्टम से मौत के कारणों का पूरा पता नहीं लग पाता। फारेंसिक लैब से आई विसरा रिपोर्ट में दोनों की मौत की वजह जहर खाना बताया गया है। पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है। परिजनों और ग्रामीणों की मांग पर मामला सीआईडी को देने के लिए पुलिस तैयार है। वह स्वयं इस बारे इस मामले की जांच की पूरी रिपोर्ट सहित पुलिस महानिदेशक को भेजकर सीआईडी से पुन: जांच करवाने की सिफारिश करेंगी।