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पांवटा में शिक्षा का व्यापारीकरण रोकने पर अभिभावकों का प्रदर्शन

Mon, 17 Apr 2017 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो पांवटा
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बैंकों में हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
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पांवटा साहिब(सिरमौर)। हिमाचल यूथ ब्रिगेड के साथ मिल कर अभिभावकों ने शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ रैली निकाली। सोमवार को विश्वकर्मा चौक से लेकर मिनी सचिवालय तक रैली निकालते हुए जमकर नारेबाजी की गई। एसडीएम पांवटा एचएस राणा के माध्यम से सीएम वीरभद्र सिंह व मुख्य सचिव हिप्र को ज्ञापन भेजा गया है। 
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सोमवार को यूथ ब्रिगेड के प्रधान इंद्रजीत सिंह मिक्का व महासचिव दीपक दूबे के नेतृत्व में अभिभावक विश्वकर्मा मंदिर परिसर के पास एकत्र हुए। 
परमिंद्र सिंह पम्मी, हरदेव सिंह, रणजीत कौर,  प्रमिंद्र सिंह, अवतार सिंह, नीरज वर्मा, प्रेमपाल वर्मा, मीनू वर्मा, नरेंद्र कौर, उषा देवी, इंद्रप्रीत कौर, हरप्रीत कौर, संजू भारद्वाज, हरप्रीत कौर, नीरु, किरण, सुनीता, धीरेंद्र सिंह, मंजीत कौर, गुरनाम सिंह, महेंद्र पाल, मनप्रीत सिंह, शमशेर, बलविंद्र सिंह, सतीश धीमान, मीरा रानी, अतुल, संजीव, अच्छर सिंह, प्रिया, रजनी शर्मा, कमल गुप्ता, अभिभावक विकास बंसल, बेनजीर, किरणबाला, रमेश चौहान, फरीद खान, विनोद ठाकुर ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने की मांग रखी है।

कहाकि सीएम व प्रदेश सरकार शीघ्र इस बारे में कोई ठोस कदम उठाए जिससे मनमानी फीस वसूली, हर वर्ष री-एड्मिशन, वार्षिक फंड, भारी फीस, जूते, टाई-बेल्ट, बुक्स, कापियों व स्टेशनरी के भी मनमाने दाम वसूले जाते हैं जिससे मध्यम व निर्धन वर्ग के परिवारों की पहुंच से बच्चों की शिक्षा दूर होती जाएगी। खर्चीली होती शिक्षा के चलते अभिभावकों की आर्थिक रुप से कमर टूट रही है। अधिकतर अभिभावकों की कमाई का 50 फीसदी हिस्सा बच्चों की शिक्षा पर खर्च रहा है। परेशान होकर अभिभावक सड़कों पर उतर गए हैं। 
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उधर, एसडीएम पांवटा एचएस राणा ने पुष्टि की है। एसडीएम ने कहा कि यूथ ब्रिगेड व अभिभावकों की मांग को सीएम व प्रदेश सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। 
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जबरन थमाई जा रही 5 मंहगी बुक्स : अभिभावक 
-एक अभिभावक ने कहा कि बेटी देवीनगर स्थित एक पब्लिक स्कूल में कक्षा प्रथम में शिक्षारत है। स्कूल प्रबंधन ने मेंटल मैथ, लेट्स फाइंड फेक्टस, निर्झर मोती, तपस और टेबल्स नाम का 5 मंहगी पुस्तकें दे दी हैं। अभिभावकों का कहना है कि ये स्कूल प्रबंधन वर्ग की तरफ से है ही नहीं। इस संदर्भ में स्कूल के दिल्ली प्रबंधन वर्ग से सीधा संपर्क किया गया, तो पता चला कि ऐसा नही कर सकते। बच्चों की पहले ही अत्यधिक स्कूल फीस है। इस तरह की मनमानी व आर्थिक बोझ थोप दिए जाने से अभिभावक काफी नाराज हैं। इसकी लिखित शिकायत दिल्ली प्रबंधन को भेज दी जा रही है। 
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