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दवाइयों के साथ मल्टीनेशनल कंपनियों के लेबल भी बरामद

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नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब के पुरूवाला में बरामद 46900 कैप्सूल, कोडीन सिरप की 9500 शीशियों के मामले में ड्रग कंट्रोल विभाग और पुलिस की कार्रवाई जारी है। शनिवार को ड्रग विभाग ने अदालत में पेश करने के बाद जखीरे को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, अभी तीनों आरोपी फरार हैं। मामले में खुलासा हुआ है कि स्टोर में बरामद दवाओं पर लेबल चढ़ाए जाने थे। जांच के दौरान ड्रग विभाग को स्टोर से लेबल भी बरामद हुए हैं। ड्रग विभाग की मानें तो ये लेबल देहरादून और बंगलूरू में चल रही मल्टीनेशनल कंपनियों के हैं। बिना लाइसेंस के ही दवाइयों की खेप तैयार की गई। बरामद की गईं दवाइयां नशीली हैं। हालांकि, कोडीन और ट्रामाडोल दर्द निवारक दवाएं हैं लेकिन, इन्हें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की अनुमति बगैर तैयार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए लाइसेंस लेना होता है। प्रदेश में यह पहला मामला हो सकता है जब स्टेट नारकोटिक्स क्राइम कंट्रोल, ड्रग विभाग समेत पुलिस ने संयुक्त रूप से इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके से इन प्रतिबंधित दवाओं की 28 पेटियां और 27 कट्टे भरे गए। साफ जाहिर है कि इतनी बड़ी खेप की गिनती में भी अधिकारियों को कई घंटे लग गए। इन दवाओं के साथ एंटीबायटिक और लूज टेबलेट भी बरामद हुई हैं।
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शरीर को कमजोर कर देती हैं ये दवाइयां
कोडीन साल्ट और ट्रामाडोल जैसे नशीले कैप्सूल का अधिक इस्तेमाल जानलेवा भी साबित हो सकता है। इनका ज्यादा इस्तेमाल नशे का आदी बना देता है। धीरे-धीरे इनकी आदत शरीर को खोखला कर देती है। नशे की लत में पड़े किसी भी व्यक्ति की इससे छूटना असंभव है।
कस्टडी में ली हैं दवाइयां
ड्रग इंस्पेक्टर नाहन ललित कुमार ने बताया कि पुरूवाला से बरामद दवाओं का कोई भी लाइसेंस नहीं था। बिना लाइसेंस के ही इतनी बड़ी खेप को स्टोर में छिपाकर रखा गया था। उन्होंने बताया कि स्टेट ड्रग कंट्रोलर नवनीत मरवाहा की अगुवाई में इतना बड़ा ऑपरेशन सफल हुआ। उन्होंने माना कि दवाइयों के साथ मल्टीनेशनल कंपनी के लेबल भी बरामद हुए हैं जिन्हें अभी चढ़ाया नहीं गया था। उन्होंने बताया कि दवाओं को विभाग ने अपनी कस्टडी में ले लिया है।
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