नाहन (सिरमौर)। शिलाई के बकरास में हुई केदार सिंह जिंदान की कथित हत्या के बाद न्याय के लिए दलित समुदाय से जुड़े लोग सड़कों पर उतर गए हैं। बुधवार को नाहन शहर में रैली निकालते हुए दलित शोषण मुक्ति मंच और कई अन्य संगठनों से जुड़े लोगों ने केदार सिंह जिंदान की हत्या के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। इस दौरान नाहन केदार सिंह जिंदान को न्याय दो..., केदार सिंह जिंदान अमर रहे के नारों से गूंज उठा। इससे पहले हिंदू आश्रम में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन हुआ। इसमें भारी संख्या में उमड़े लोगों ने जिंदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जिंदान की पत्नी और बेटी भी मौजूद रही।
श्रद्धांजलि समारोह में वक्ताओं ने कहा कि मात्र बयानबाजी या ज्ञापन सौंपने से न्याय नहीं मिलेगा। इसके लिए सड़कों पर उतरकर लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि यदि ठियोग के विधायक राकेश सिंघा सड़क पर नहीं उतरते तो जिंदान को न्याय दिलाने के लिए इतनी प्रगति नहीं हुई होती। वक्ताओं ने 26 सितंबर को प्रदेशभर में धरना प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया। वक्ताओं ने आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट पर भी खुलकर अपने विचार प्रकट किए। इसके बाद हिंदू आश्रम से निकली रैली उपायुक्त कार्यालय तक पहुंची। इसके बाद विभिन्न संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर मामले में न्याय की मांग की। साथ ही सोशल मीडिया में दी जा रही धमकियों पर संज्ञान लेते हुए इसकी एफआईआर दर्ज करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने बाकायदा इससे जुड़े दस्तावेज उपायुक्त को सौंपे।
दलित शोषण मुक्ति मंच एवं कई अन्य संगठनों ने कहा कि शिलाई के बकरास में हुई केदार सिंह जिंदान की हत्या एक सुनियोजित षड्यंत्र है। लिहाजा, इस मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। नाहन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मंच के महासचिव आशीष कुमार सहित अन्य संगठनों से जुड़े संदीपक, प्रदीप सहोत्रा, रामेश्वर सिंह, विजय चौरिया, बलवीर सिंह, अमर सिंह ने कहा कि परिजन और दलित समुदाय से जुड़े लोग पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले में धारा 120 बी के साथ ही एससीएसटी एक्ट की सभी धाराएं जोड़ी जाएं।
राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा है कि केदार सिंह जिंदान की हत्या से दलित समुदाय में दहशत का माहौल है। हत्याकांड में शामिल लोग ऊंची पहुंच वाले हैं। पुलिस पर भी इसका प्रभाव है। लिहाजा, इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। इसके अलावा ज्ञापन में राज्य सरकार के मंत्री की ओर से किए गए वायदे के मुताबिक 20 लाख रुपये मुआवजा देने, जिंदान की पत्नी को योग्यतानुसार नौकरी, दोनों बेटियों को मुफ्त शिक्षा देने, पत्नी, बेटियों और परिवार को सुरक्षा मुहैया करवाने, परिवार को सरकारी मकान देने और तब तक किराये के मकान का प्रावधान करने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों की सुरक्षा के लिए केदार हेल्पलाइन शुरू करने, एफआईआर में एससीएसटी एक्ट की सभी धाराओं के साथ 120बी जोड़ने की मांग उठाई गई है।