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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में 15 लाख मुआवजे और एक साल कैद की सजा बरकरार

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मेसर्स अत्री सीड्स एंड पेस्टिसाइड्स का मामला, कोर्ट से लेन-देन का हवाला देकर सजा बढ़ाने की मांग खारिज
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अदालत ने कहा-एनआई एक्ट का मुख्य उद्देश्य भुगतान सुनिश्चित करना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस मामले में दोषी को सुनाई गई सजा और मुआवजा बढ़ाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कारोबारी लेन-देन होने के आधार पर अधिकतम सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक साल की कैद और 15 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को सही ठहराया।
यह मामला मेसर्स अत्री सीड्स एंड पेस्टिसाइड्स की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से 26 सितंबर 2025 को सुनाए गए फैसले में सजा कम होने का हवाला देते हुए उसे बढ़ाने की मांग की थी। निचली अदालत ने उप-तहसील पझौता निवासी मंदीप शर्मा को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए सजा और मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही मुआवजा अदा नहीं करने पर दो माह अतिरिक्त कैद का प्रावधान भी रखा था।
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अदालत ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह अपराध मुख्य रूप से सिविल प्रकृति का है और दंडात्मक पहलू केवल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए रखा गया है। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित सजा सुनाई है। ऐसे में उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।
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