भूमि विवाद में यथास्थिति बरकरार, तीसरे पक्ष को अधिकार देने पर रोक
नाहन। न्यायालय ने एक भूमि विवाद मामले में अंतरिम राहत देते हुए संबंधित भूमि पर कब्जे की स्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने का आदेश दिया है। साथ ही, प्रतिवादी को विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का तीसरे पक्ष का हित सृजित करने से मुख्य वाद के अंतिम निस्तारण तक रोक दिया है।
मामला उपतहसील रोनहाट के निवासियों की ओर से दायर वाद से जुड़ा है। वादियों ने आरोप लगाया कि विवादित भूमि से संबंधित वसीयत और उपहार विलेख (गिफ्ट डीड) धोखाधड़ी से तैयार किए गए हैं। उनका कहना है कि एक महिला ने परिवार की सदस्य बताकर स्वयं को वास्तविक उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया और बाद में उक्त दस्तावेजों के आधार पर भूमि का हस्तांतरण कर दिया।
दूसरी ओर, प्रतिवादी ने आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया कि संबंधित महिला परिवार की सदस्य और भूमि में हिस्सेदार थी। दोनों पक्षों की ओर से भूमि पर कब्जे का दावा किए जाने और दस्तावेजों की वैधता को लेकर गंभीर विवाद होने के कारण न्यायालय ने माना कि स्वामित्व और कब्जे का अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है। न्यायालय ने यह भी कहा कि वसीयत एवं उपहार विलेख के निष्पादन में धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच मुख्य वाद में की जाएगी।
न्यायालय ने आदेश में कहा कि यदि प्रतिवादी को भूमि में तीसरे पक्ष का हित सृजित करने की अनुमति दी गई तो अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ सकती है। इसी आधार पर अदालत ने दोनों पक्षों को भूमि पर वर्तमान कब्जे की स्थिति बनाए रखने तथा प्रतिवादी को अपने कथित हिस्से में किसी प्रकार का तीसरे पक्ष का अधिकार देने से रोक दिया।
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