वरिष्ठ सिविल जज ने सुनाया फैसला, उत्तराखंड की महिला से 9 फीसदी ब्याज सहित होगी वसूली
साल 2016-17 का मामला, दंपती ने नाहन के युवक को निवेश के लिए किया था प्रेरित
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। खनन कारोबार में साझेदारी का सपना दिखाकर लाखों रुपये लेने के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। वरिष्ठ सिविल जज उपासना शर्मा ने उत्तराखंड निवासी वंदना अग्रवाल को नाहन निवासी सतपाल अग्रवाल के 35 लाख रुपये लौटाने के निर्देश दिए हैं।
अदालत में दायर वसूली वाद के अनुसार वादी के बेटे अभिषेक की जान-पहचान देहरादून में रहने वाले राजीव अग्रवाल और उनकी पत्नी वंदना अग्रवाल से थी। आरोप है कि दोनों ने खनन कारोबार शुरू करने की योजना बताकर निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके बाद वर्ष 2016 से 2017 के बीच अलग-अलग किस्तों में करीब 46 लाख रुपये वंदना अग्रवाल के खाते में ट्रांसफर किए गए। वादी का कहना था कि रकम लेने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया गया और बहाने बनाए जाते रहे। बाद में दबाव पड़ने पर 7 नवंबर 2019 को एक लिखित समझौता किया गया। इसमें 35 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकार की गई थी।
वहीं, प्रतिवादी ने अदालत में कहा कि बैंक खाते का संचालन उसके दिवंगत पति करते थे और उसे लेन-देन की जानकारी नहीं थी। साथ ही यह भी दावा किया गया कि समझौते पर दबाव में हस्ताक्षर करवाए गए। सुनवाई के दौरान अदालत ने बैंक रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और समझौते से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि वादी की ओर से बड़ी राशि प्रतिवादी के खाते में ट्रांसफर की गई थी और समझौता भी वैध रूप से निष्पादित हुआ था। हालांकि अदालत ने 46 लाख रुपये की बजाय 35 लाख रुपये की देनदारी को ही प्रमाणित माना। अदालत ने फैसले में कहा कि वादी 35 लाख रुपये की वसूली तथा मुकदमा दायर करने की तिथि से अदायगी तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का हकदार है। अदालत ने वाद आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए डिक्री पारित कर दी। संवाद