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Sirmour News: अनुचित संपत्ति प्राप्ति का माध्यम नहीं बन सकती अदालत

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फर्जी जमीन बिक्री का दावा खारिज, अदालत ने वादी की मंशा पर उठाए सवाल
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स्वयं तथ्यों से अवगत होने के बावजूद अनुचित लाभ लेने का कर रहा प्रयास
फर्जी तरीके से बिक्री विलेख पंजीकृत करवाने के बाद भूमि को एचपी पावर कॉरपोरेशन को बेचने के थे आरोप
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जमीन की फर्जी बिक्री और धोखाधड़ी के मामले में सिविल जज विकास कपूर ने कहा कि वादी यशपाल सिंह अपने आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है और मामला समय सीमा से भी बाहर है। यदि वास्तव में धोखाधड़ी हुई होती तो वादी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज न कराना उसके दावे को कमजोर करता है। ऐसे में अदालत किसी भी प्रकार की अनुचित संपत्ति प्राप्ति का माध्यम नहीं बन सकती। इन आधारों पर अदालत ने मुकदमा खारिज करते हुए टिप्पणी की कि वादी का दावा न केवल वर्जित है। बल्कि वह स्वयं तथ्यों से अवगत होने के बावजूद अनुचित लाभ लेने का प्रयास कर रहा है।
संगड़ाह के यशपाल सिंह ने दावा किया था कि उसकी 1/6 हिस्सेदारी वाली करीब 185 बीघा जमीन को वर्ष 2006 में धोखाधड़ी से बेच दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी तरीके से बिक्री विलेख पंजीकृत कराया गया और बाद में यह भूमि एचपी पावर कॉरपोरेशन को बेच दी गई। जिस पर रेणुका जी बांध परियोजना प्रस्तावित है। वादी ने अदालत से जमीन का कब्जा दिलाने के साथ-साथ वर्ष 2006 और 2009 में हुए दोनों बिक्री विलेखों को रद्द करने और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियों को अवैध घोषित करने की मांग की थी।
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वहीं, एचपी पावर कॉरपोरेशन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जमीन सार्वजनिक हित में विधिवत तरीके से खरीदी गई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और वादी के आचरण का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि वादी को बिक्री विलेख की जानकारी शुरू से थी। उसने करीब 12 वर्षों बाद वर्ष 2019 में मुकदमा दायर किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमीन पर हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन का स्वामित्व वैध है।
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