उत्तराखंड की तर्ज पर गोमाता को देवभूमि हिमाचल में भी राज्यमाता घोषित करें
द्वेष की भावना से गोसेवकों पर दायर मामलों को खत्म किया जाए : गोसेवक
राशन डिपो में गोशालाओं में बने धूप-अगरबत्ती, घृत, गोमूत्र बिक्री मंजूरी मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। स्थानीय गोसेवकों ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान गोसेवकों पर दायर मामलों को खत्म करने की गुहार लगाई है। गोसेवकों की ओर से अनशन और धरना करने पर ये मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही राशन डिपो में गोशालाओं में बने धूप अगरबत्ती, घृत, गोमूत्र बिक्री मंजूरी प्रदान करने की मांग उठाई गई है।
गोसेवक सचिन ओबरॉय, अजय संसरवाल, शशिपाल चौधरी, अश्वनी शर्मा, हेमंत शर्मा और नरेंद्र शर्मा ने बताया कि विगत शनिवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से गोसेवकों का एक प्रतिनिधिमंडल मिला था। इस दौरान एक ज्ञापन भी सौंपा गया जिसमें गोसेवकों ने विभिन्न समस्याओं को उनके समक्ष रखा और समाधान की मांग की है।
प्रदेश में अब भी सड़कों पर करीब 15,000 गोवंश मौजूद है, जो इस ठंड में भी घायल और बीमार होकर मरने को सड़कों पर मजबूर हैं। गोसेवकों ने मांग रखी है कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की तर्ज पर गोमाता को देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भी राज्यमाता घोषित किया जाए। इसके लिए कठोर कानून बनाया जाए ताकि गोवंश छोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो सके। गोसेवक सचिन ओबराय और अजय संसरवाल ने कहा कि गोसंरक्षण की आवाज उठाने वाले गोसेवकों पर दर्ज झूठे मामले खारिज किए जाएं।
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