नाहन। जिला एवं सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में नवंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सहकारी संस्था की अपील खारिज कर दी। न्यायाधीश गौरव महाजन ने माना कि शिकायत कानूनी नोटिस की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दायर की गई थी, इसलिए वह कानूनन विचारणीय नहीं थी।
मामले के अनुसार, ज्योति को-ऑपरेटिव नॉन एग्रीकल्चर थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी ने आरोप लगाया था कि आरोपी जयप्रकाश ने वर्ष 2015 में 1.75 लाख का ऋण लिया था। किस्तें जमा न करने पर बकाया राशि 2.96 लाख से अधिक हो गई। इस देनदारी के निर्वहन के लिए जारी चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद संस्था ने कानूनी नोटिस भेजकर अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नोटिस की वास्तविक तामील का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं था। ऐसे में कानून के अनुसार नोटिस को 30 दिन बाद तामील माना गया। इसके बाद आरोपी को भुगतान के लिए मिलने वाले 15 दिन पूरे होने से पहले ही शिकायत दायर कर दी गई थी। इसलिए शिकायत समय से पूर्व मानी गई।
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