पत्रकार वार्ता
थोड़ी सी वित्तीय सहायता पाने के लिए प्रदेश सरकार भी कर रही लागू
जनविरोधी नीतियों के विरोध में सिरमौर से सचिवालय जाएंगे 400 किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। देश गहरे कृषि संकट से गुज़र रहा है। केंद्र सरकार इस संकट को और गहरा करने के लिए जनविरोधी नीतियां लोगों पर थोप रही है। प्रदेश सरकार का रिकॉर्ड भी ऐसा ही है, जो इन नीतियों को थोड़ी-सी वित्तीय सहायता पाने के लिए लागू कर रही है। इसके विरोध में हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ 19 जनवरी को शिमला सचिवालय में एकत्रित होंगे।
यह बात रविवार को नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में हिमाचल किसान सभा के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिले से 400 के करीब किसान और संगठन से जुड़े लोग शिमला जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना, ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को रद्द करना, मंडी मध्यस्थता योजना के बजटीय प्रावधानों को खत्म करना, सभी कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने से इंकार करना, बिजली विधेयक और मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिता को लागू करना जनविरोधी नीतियों के स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2025 में भूमि से बेदखली, सेब के पेड़ों की कटान, मकानों की सीलिंग के विरुद्ध संघर्ष, दूध उत्पादकों का संघर्ष, जलविद्युत परियोजना प्रभावित किसानों का संघर्ष, मनरेगा मज़दूरों का संघर्ष, बीओसी मजदूरों का संघर्ष और स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, सहारा योजना आदि को बंद करने के खिलाफ जनता ने संघर्षों में अपनी भागीदारी निभाई है। आने वाले साल में भी इन संघर्षों को और तेज करने की जरूरत है। ये संघर्ष तब तक जारी रहेंगे जब तक सरकार इन मांगों को पूरा नहीं करती है।
हिमाचल किसान सभा और सेब उत्पादक संघ राज्य सरकार से मांग करती है कि 2026-27 के बजट की तैयारी करते जनता के मुद्दों को अवश्य ध्यान में रखें। इनमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार किसानों को कम से कम 5 बीघा अथवा 10 कनाल भूमि देने की नीति बनाए। साथ ही घरों और ज़मीन की बेदखली पर तुरंत रोक लगाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पौंग बांध विस्थापितों का पुनर्वास, वन अधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने, दूध उत्पादकों को मासिक आधार पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य को 60 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जाए। केंद्र सरकार से न्यूजीलैंड, अमरीका व अन्य देशों के साथ किसी भी तरह के मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता को रोकने की पैरवी और सेब पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाए।
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