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परिवर्तन को स्वीकार करना ही जीवन का है सार : पं. शांडिल्य

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नर्मदेश्वर शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का समापन
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-कथा समापन पर भंडारे का हुआ आयोजन, जिसमें श्रद्धालुओं ने चखा प्रसाद

संवाद न्यूज एजेंसी

राजगढ़ (सिरमौर)। बड़ोग (रहेड) स्थित नर्मदेश्वर शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का समापन पूर्णाहुति, विशेष हवन और भव्य भंडारे के साथ हुआ। सात दिवसीय इस आयोजन में क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समापन दिवस पर प्रात काल विशेष हवन यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति डालकर परिवार व समाज की मंगलकामना की।
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कथा वाचन देवठी मझगांव निवासी पंडित कृष्ण कांत शांडिल्य ने किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि का क्रम अनवरत चलता रहता है। किसी एक व्यक्ति के आने या जाने से संसार की गति नहीं रुकती। उन्होंने बताया कि मनुष्य की पीड़ा अपेक्षाओं और वास्तविकता के टकराव से जन्म लेती हैं। इसलिए अहंकार और मोह का त्याग कर परिवर्तन को स्वीकार करना ही जीवन का सार है। संवाद
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