नाहन (सिरमौर)। अलौकिक रथ में विराजमान भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र...! सिरमौरी शहनाई की तान, ढोल नगाड़े की थाप और पंजाब के बैंड-बाजे का धमाल। जी हां, रविवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा का नजारा कुछ ऐसा ही था।
स्वर्ग तुल्य बने वातावरण में नाहन शहर का परिवेश ‘जय श्री जगन्नाथ, स्वामी जगन्नाथ...’ के जयकारे से गूंज उठा। सिर पर कलश लिए महिलाएं प्रभु भक्ति में थिरक रहीं थीं तो पंजाब के युवकों के करतब और डांडिया आकर्षण का केंद्र रहे। आस्था ऐसी कि रास्ते में आए कंकड़-पत्थर की किसी ने परवाह नहीं की। रथ का रस्सा खींचने के लिए लोग नंगे पांव कई मील पैदल चले।
समय सुबह करीब नौ बजे। बड़ा चौक स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हुई। यहां से भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र पालकी में सवार होकर चौगान को निकले। 10:55 बजे शोभायात्रा चौगान मैदान पहुंची। इसके बाद शुरू हुआ आस्था के समुद्र में डुबकी लगाने का सिलसिला।
सिरमौर के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, हारूलों की धुन सबसे आगे रही। ‘कृपालु भगवन, दयालु भगवन...’भजन के बोल शहनाई की धुन में पिरोकर हरिपुरधार से आए दल ने माहौल को भक्तिमय बना डाला। भजन-कीर्तन करते हुए श्रद्धालु भगवान का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़े। वहीं सिक्ख समुदाय के युवकों ने डांडिया व अन्य करतब दिखाए। शोभा यात्रा में हिस्सा ले रहे श्रद्घालुओं के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में दूध, फलों व मिठाइयों आदि के स्टाल लगाए गए थे। शाम करीब सात बजे रथयात्रा संपन्न हुई। इसके बाद विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया।