सत्र न्यायालय की टिप्पणी, कोर्ट ने एनडीपीएस में चार आरोपी पर आरोप जोड़ने से किया इन्कार
ददाहू क्षेत्र में साल 2021 का मामला, अब एक आरोपी पर एनडीपीएस और तीन पर चलेगा पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट का मामला
जुए के मामले में पकड़े गए थे चार आरोपी, नशीली दवाएं केवल एक के पास से मिलीं
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जिले के ददाहू स्थित एक निजी होम स्टे में जुआ खेलने के मामले में पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सभी पर आरोप जोड़ने की राज्य सरकार की मांग को अदालत ने खारिज कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि नशीली दवाओं की बरामदगी केवल एक आरोपी से हुई है। ऐसे में अन्य आरोपियों पर साजिश या सहयोग का आरोप नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल एक कमरे में मौजूद होने या जुआ खेलने मात्र से एनडीपीएस एक्ट के तहत आपराधिक साजिश सिद्ध नहीं होती।
यह मामला साल 2021 का है। राज्य सरकार ने सीआरपीसी के तहत सभी आरोपियों पर सार्वजनिक जुआ अधिनियम के साथ-साथ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 जोड़ने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि सभी आरोपी जुआ खेल रहे थे और एक आरोपी के पास से नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। इसलिए सभी को सह-अपराधी माना जाए।
अदालत ने मामले की जांच रिपोर्ट, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि 155 ट्रामाडोल युक्त कैप्सूल आरोपी तारा चंद की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद हुए थे। रणदीप, गोपी चंद और सुरजन के पास न तो नशीला पदार्थ मिला और न ही जांच में यह सामने आया कि उन्हें इसकी जानकारी थी। अदालत ने सरकार का आवेदन खारिज करते हुए आदेश दिया कि आरोपी तारा चंद के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत मुकदमा चलेगा, जबकि अन्य आरोपियों पर केवल पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट के तहत ही कार्रवाई जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को निर्धारित की गई है।
संवाद
सचेत और विशेष कब्जा सिद्ध करना जिम्मेदारी
अभियोजन पक्ष कॉल रिकॉर्ड, लेन-देन या अन्य ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि एनडीपीएस मामलों में सचेत और विशेष कब्जा सिद्ध करना अभियोजन की जिम्मेदारी है।