संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला न्यायालय ने भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े एक दीवानी विवाद में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए वादी की अपील खारिज कर दी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने कहा कि वादी अपनी भूमि का स्वामित्व और पूर्व सीमांकन तो साबित कर सका, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि प्रतिवादियों ने वास्तव में उसकी भूमि पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण किया था।
तहसील नाहन निवासी वादी तेजवीर सिंह ने दावा किया था कि प्रतिवादियों गोपी चंद और मुकेश कुमार ने मई 2016 में उसकी भूमि पर लकड़ी के खंभे लगाकर बाड़बंदी कर अवैध कब्जा कर लिया। उसने स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा के साथ कब्जा बहाल करने की मांग की थी। हालांकि, सिविल जज ने मार्च, 2024 में वाद खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ जिला न्यायालय में अपील दायर की गई। अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2015 में दोनों पक्षों की भूमि का विधिवत सीमांकन हो चुका था। इससे केवल भूमि की सीमाएं स्पष्ट होती हैं, लेकिन इससे बाद में अतिक्रमण होने का तथ्य स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता।
अदालत में जिन पारिवारिक सदस्यों को प्रत्यक्षदर्शी बताया गया, उन्हें गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। अन्य गवाह भी अतिक्रमण की घटना को विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सके। ऐसे में वादी अपने आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में असफल रहा। इन परिस्थितियों में जिला न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) का अंतिम निष्कर्ष विधिसम्मत है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।