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Sirmour News: पांच साल बाद भी ठंडे बस्ते में भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की योजना

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पांवटा साहिब के यमुना नदी किनारे प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की योजना ठन्डे बस्ते में । संवाद
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यमुना नदी किनारे भगानी से पांवटा यमुना पुल तक प्रस्तावित था संपर्क मार्ग, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में हादसों का खतरा बरकरार
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खनन सामग्री की ढुलाई से सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व, वैकल्पिक मार्ग बनने से आय दोगुनी होने की उम्मीद
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब शहर और आसपास की पंचायतों को भारी वाहनों के दबाव से राहत दिलाने के लिए यमुना नदी किनारे वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना पांच साल बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। भारी वाहनों की आवाजाही के चलते शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोगों ने राज्य सरकार, लोक निर्माण विभाग, प्रशासन और खनन विभाग से इस योजना पर गंभीरता से काम करने की मांग उठाई है। वैकल्पिक मार्ग बनने से जहां भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में हादसों का खतरा कम हो सकता है, वहीं खनन सामग्री की ढुलाई बढ़ने से सरकार और खनन विभाग के राजस्व में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
हिमोत्कर्ष सिरमौर संस्था के अध्यक्ष आरपी तिवारी, सिरमौर निजी बस ऑपरेटर संघ के प्रधान बलविंद्र सिंह पुरेवाल, सुरजीत सिंह, हरभजन सिंह और कंवर ठाकुर का कहना है कि करीब पांच साल पहले तत्कालीन एसडीएम पांवटा साहिब विवेक महाजन ने जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर गंभीरता से काम किया था। उस दौरान भारी वाहनों को शहरी और ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों से बाहर निकालने के लिए यमुना नदी के किनारे वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना को आगे बढ़ाया गया था।
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प्रस्ताव के तहत भगानी, नवादा और मानपुर देवड़ा से पांवटा साहिब स्थित यमुना पुल तक नदी किनारे अलग संपर्क मार्ग बनाने की योजना प्रस्तावित थी। इससे शहर और आसपास की पंचायतों से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होने के साथ सड़क हादसों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
तीन राज्यों तक पहुंचती है खनन सामग्री
पांवटा साहिब के दून क्षेत्र में नदियों के आसपास क्रशर उद्योग संचालित हैं। यहां से रेत, बजरी और अन्य खनन सामग्री लेकर भारी वाहन उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा तक जाते हैं। इन वाहनों की आवाजाही के कारण व्यस्त सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हरिपुर टोहाना के समीप करीब पांच साल पहले हुए हादसे में गिरिपार क्षेत्र के एक युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं, शिवपुर और रामपुरघाट मार्ग पर ट्रक-ट्रालों से जुड़े हादसों में भी स्थानीय लोग जान गंवा चुके हैं। इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने रेत-बजरी और क्रशर सामग्री ढोने वाले वाहनों की आवाजाही के लिए रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक का समय निर्धारित किया था। हालांकि, लोगों का मानना है कि भारी वाहनों के लिए अलग मार्ग बनने से दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में अधिक मदद मिल सकती है।

एफआरआई के चलते आगे नहीं बढ़ सकी योजना : एसडीएम
एसडीएम पांवटा साहिब द्विज गोयल ने बताया कि पहले प्रस्तावित योजना एफआरआई के चलते सिरे नहीं चढ़ सकी थी। हालांकि, शहरी और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बाहर वैकल्पिक सड़क बनाने की योजना पाइपलाइन में है। इसे सिरे चढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
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राजस्व में वृद्धि के साथ हादसों में कमी की उम्मीद
सिरमौर क्रशर संघ के अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा का कहना है कि यमुना नदी किनारे वैकल्पिक मार्ग बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार और जिला खनन विभाग को वर्ष 2024-25 में 54.86 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में करीब 52.09 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि खनन सामग्री की ढुलाई रात के समय भी होती है। यदि वैकल्पिक मार्ग तैयार हो जाता है, तो भारी वाहनों की आवाजाही सुगम होने के साथ प्रदेश सरकार और खनन विभाग के राजस्व में दोगुनी वृद्धि की संभावना बन सकती है। इससे शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने तथा सड़क हादसों के जोखिम को घटाने में भी मदद मिलेगी।
संवाद-

पांवटा साहिब के यमुना नदी किनारे प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की योजना ठन्डे बस्ते में । संवाद

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