रोनहाट (सिरमौर)। शिलाई उपमंडल के नैनीधार गांव में एक गाय ने दो मुंह वाले बछड़े को जन्म दिया। क्षेत्र में इस तरह का मामला पहली बार सामने आने की बात ग्रामीणों ने कही है। जन्म के बाद बछड़े को बचाया नहीं जा सका, लेकिन समय रहते उपचार मिलने से फार्मासिस्ट ने कड़ी मशक्कत के बाद गाय की जान बचा ली।
जानकारी के अनुसार, नैनीधार निवासी अजय ठाकुर की गाय को प्रसव के दौरान करीब सात से आठ घंटे तक लगातार पीड़ा होती रही। लंबे समय तक प्रसव नहीं होने से गाय की हालत बिगड़ने लगी। इसकी सूचना मिलने पर पशु औषधालय में तैनात वेटरनरी फार्मासिस्ट चमेल ठाकुर मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लेने के बाद आवश्यक उपचार शुरू किया।
बताया गया कि प्रसव की स्थिति बेहद कठिन थी और गाय की जान बचाना भी चुनौती बन गया था। फार्मासिस्ट चमेल ठाकुर ने काफी देर तक प्रयास करते हुए आवश्यक उपचार किया और आखिरकार गाय को सुरक्षित बचाने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो मुंह वाले बछड़े को बचाया नहीं जा सका। पशु मालिक अजय ठाकुर ने समय पर मौके पर पहुंचकर उपचार करने के लिए फार्मासिस्ट चमेल ठाकुर का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो गाय की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। ग्रामीणों ने भी फार्मासिस्ट की तत्परता और सेवाभाव की सराहना की। संवाद