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यहां तो शव भी सुरक्षित नहीं!

Wed, 18 Jun 2014 05:32 AM IST
Sirmour
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नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले में शवों को सुरक्षित रखने तक की उचित व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय नाहन समेत जिले के पांच बड़े अस्पतालों में डीप फ्रीजर नहीं हैं। ऐसे में हादसे के शिकार लोगों के शव सुरक्षित रखना मुश्किल होता है। गर्मियों में शव के सड़ने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। सबसे ज्यादा चुनौती लावारिस शवों के साथ होती है, जिन्हें कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
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सोमवार देर शाम को हुए बस हादसे के बाद भी ऐसी ही परिस्थितियां पैदा हुई। बड़ी तादाद में शव नाहन अस्पताल पहुंचे, लेकिन परिजनों के आने तक उन्हें सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। देखा जाए तो जिले में शवों को सुरक्षित रखना जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना है। हैरानी की बात है कि क्षेत्रीय अस्पताल नाहन सहित जिला के अन्य पांच बड़े पांवटा, ददाहू, शिलाई, संगड़ाह तथा राजगढ़ अस्पतालों में डीप फ्रीज की व्यवस्था नहीं है। 16 जून को मधाराघाट बस हादसा हो या फिर पिछले वर्ष जून में हरिपुरधार में भराड़ी हादसा। या फिर दो माह पूर्व टिंबी हादसा। इन सभी हादसों के गंभीर घायलों को किसी न किसी रूप में नाहन अस्पताल लाया गया। मगर मौत के बाद शव शवगृह में बिना फ्रिज की सहायता के परिजनों की इंतजार के लिए रखे गए। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो फ्रीज के लिए तकरीबन दो वर्ष पूर्व बीएसएनएल को 47 लाख रुपये मुहैया करवाए गए थे। मगर बीएसएनएल इस पर अभी तक कार्रवाई नहीं कर रहा।

कोट
सिरमौर के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. हरमोहिंदर सिंह मानते हैं कि शवगृहों के भीतर डीप फ्रीज की सुविधा नहीं है। बिना बजट की सुविधा के यह समस्या है। विभाग थ्री इन-वन फ्रिज का प्रावधान कर रहा है। इसमें एक फ्रीज के भीतर तीन शवों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके लिए तकरीबन छह लाख रुपयों के बजट की जरूरत होगी। इसके अलावा भी कोल्ड फ्रिज हेतु 47 लाख रुपये बीएसएनएल को दिए थे। इसपर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
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