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सिरमौर में लहलहाएगा अमेरिकन सेब

Tue, 19 Feb 2013 05:30 AM IST
Sirmour
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राजगढ़ (सिरमौर)। अमेरिका से आयात सेब की उन्नत किस्में यहां की जलवायु में ढल गई हैं। उद्यान विभाग ने इसे बागवानों को उपलब्ध करवाने की पहल भी शुरू कर दी है। अभी यह बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं और विभाग इसे सिर्फ उन्नत बागवानों को दे रहा है। बागवानों को मात्र दो-दो पौधे दिए जा रहे है और जिन बागवानों के पास अपनी नर्सरियां हैं उन्हें पांच-पांच पौधे मिलेंगे। यह सलाह भी दी जा रही है कि वे इसकी अच्छी तरह देख भाल करके इससे प्राप्त कलमों से और अधिक पौधे तैयार करके स्वंय व अन्य बागवानों को देने का कार्य भी करें।
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इनमें डोरसेट-गोल्डन, अन्ना, चेरी-गाला, स्कारलेट-स्पर, सुपर-चीफ सेब की किस्में शामिल हैं। बागवानी उपनिदेशक डा. एसके कटोच ने बताया कि तीन वर्ष पहले विभाग ने अमेरिका से सेब की कुछ नई किस्में लाई थीं। इन किस्मों को प्रदेश के दो फार्मों अणु (शिमला) तथा सराहां (सिरमौर) में इसे रोपने तथा संख्या बढ़ाने तथा उन्हें यहां के वातावरण के अनुसार ढाला। कहा कि खुशी की बात है कि उक्त किस्मों ने यहां की जलवायु को आत्मसात कर लिया है और अब इन्हें प्रदेश के बागवानों को दो सौ रुपये प्रति पौधे के हिसाब से दिया जा रहा है।
डा. कटोच ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में इन पौधों का वितरण हो रहा है। जिला सिरमौर को 1224 पौधे मिले हैं। इनमें से 204 पौधे सरकारी नर्सरियों को तथा बाकी बागवानों में बांटे जाएंगे। उद्यान विभाग के राजगढ़ कार्यालय में 450 पौधे आए थे। इसमें से 350 बागवानों को दिए जाने थे। उद्यान विभाग राजगढ़ के विषय विशेषज्ञ डा. बलवंत सिंह गुलेरिया ने बताया कि पौधों का वितरण कर दिया है।
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बीमारी का इन पर असर नहीं
राजगढ़ (सिरमौर)। डोरसेट-गोल्डन तथा अन्ना सेब की सबसे अच्छी किस्में में से एक हैं। इनके लिए महज महज तीन सौ चिलिंग आवर्ज की जरूरत रहती है। पैदावार अच्छी होती है। यह किस्में ‘वुली एफिड’ तथा कैंकर रोग से भी दूर रहती हैं। दोनों किस्में कम ऊंचाई के लिए तैयार की गई हैं।


कैंसर से बचाता है ‘चेरी गाला’
राजगढ़ (सिरमौर)। अमेरिका से आयात सेब के पौधों में से कुछ ऐसे भी हैं जिनमें भरपूर औषधीय गुण हैं। भले ही इनका आकार छोटा है लेकिन गुण अन्य सेबों से कहीं ज्यादा हैं। ऐसी ही सेब की किस्म है ‘चेरी गाला’। सेब भले ही चेरी की तरह हो लेकिन इसमें विद्यमान औषधीय गुण कमाल के हैं। बागवानी उपनिदेशक डा. एसके कटोच ने बताया ‘चेरी गाला’ सेब कैंसर रोग से बचाता है।
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